मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने फिर अपनी योजना पर राय दी
राष्ट्रीय खबर
हैदराबादः आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक महत्वपूर्ण संबोधन में भविष्य की अपनी बड़ी योजना साझा करते हुए कहा कि राज्य की नई राजधानी अमरावती को इस तरह विकसित किया जाएगा कि वह विकास के मामले में हैदराबाद को भी पीछे छोड़ देगी।
हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में आयोजित साउथ एशियन लर्निंग समिट 2026: ट्रांसफॉर्मिंग एआई को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार पांच वर्षों की उपेक्षा के बाद अब अमरावती के पुनर्निर्माण में पूरी शक्ति से जुट गई है। उनके अनुसार, अमरावती केवल एक प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सिटी और ब्लू-ग्रीन (जल और हरियाली से भरपूर) वैश्विक राजधानी के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री नायडू ने 1995 से 2004 के बीच अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया, जब उन्होंने हैदराबाद को एक वैश्विक आईटी हब के रूप में स्थापित करने की नींव रखी थी।
उन्होंने कहा, मैंने उस समय भविष्य की कल्पना की थी कि नॉलेज इकोनॉमी ही आने वाला समय है। 1995 में कई समस्याओं के बावजूद हमने ईंट-दर-ईंट विकास किया। उन्होंने बिल गेट्स के साथ अपनी ऐतिहासिक मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उनके प्रयासों से माइक्रोसॉफ्ट ने बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों को छोड़कर हैदराबाद को चुना। उन्होंने साइबर टावर्स के निर्माण को आईटी क्रांति के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया, जिसका लाभ आज तीन दशकों के बाद भी तेलुगु समाज को मिल रहा है।
नायडू ने जोर देकर कहा कि हैदराबाद का वर्तमान पारिस्थितिकी तंत्र रातों-रात तैयार नहीं हुआ, बल्कि यह आईटी, फार्मा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम है। जीनोम वैली परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इन्हीं दूरदर्शी फैसलों के कारण आज दोनों तेलुगु राज्य फार्मा क्षेत्र में नंबर वन हैं और कोविड-19 महामारी के दौरान इसी जीनोम वैली ने पूरी दुनिया को वैक्सीन की आपूर्ति की थी। उन्होंने कहा कि सुबह-सुबह किए गए निरीक्षणों और कड़े नीतिगत फैसलों ने ही हैदराबाद को दुनिया के सबसे रहने योग्य शहरों में से एक बनाया है।
2024 में सत्ता में वापसी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक कारणों से हुए राज्य के विभाजन के बाद पिछले पांच वर्षों में आंध्र प्रदेश को खंडहर में बदल दिया गया था। उन्होंने कहा, राज्य की ब्रांड छवि खराब हो गई थी और संस्थागत ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वर्तमान गठबंधन सरकार ने राज्य को प्रगति की राह पर वापस लाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं और आज आंध्र प्रदेश निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे खड़ा है।
भविष्य की तकनीक पर बात करते हुए नायडू ने कहा कि आने वाला समय क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का है। इसके लिए राज्य सरकार ने अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन तकनीकों के लिए समर्पित हब स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। साथ ही, सरकार का ध्यान ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया पर केंद्रित है, जो भविष्य में ऊर्जा परिदृश्य पर हावी होंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि टिकाऊ बिजली उत्पादन के माध्यम से भविष्य में बिजली दरों में वृद्धि की आवश्यकता नहीं होगी और आंध्र प्रदेश पूरे दक्षिण भारत में हरित ऊर्जा के उत्पादन में नेतृत्व करने के लिए तैयार है।