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नगर निकाय चुनाव में वामपंथियों का कब्ज़ा

फ्रांस की राजनीति में मिलते नये राजनीतिक संदेश

पेरिसः फ्रांस के हालिया नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीतिक दिशा को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया है। रविवार को संपन्न हुए इन चुनावों में वामपंथी गठबंधन ने फ्रांस के तीन सबसे बड़े शहरों—पेरिस, मार्सिले और लियोन—पर अपना नियंत्रण बनाए रखने में सफलता हासिल की है।

इन चुनावों को अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक महत्वपूर्ण लिटमस टेस्ट या पूर्व-संकेत के रूप में देखा जा रहा था। जहाँ एक ओर वामपंथियों ने अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं दूसरी ओर धुर दक्षिणपंथी ताकतें किसी भी प्रमुख शहरी केंद्र को जीतने में विफल रही हैं, जो उनके लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

धुर दक्षिणपंथी दल साल 2027 को सत्ता हथियाने के अपने सबसे अच्छे अवसर के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि मतदाता मध्यमार्गी नेता इमैनुएल मैक्रॉन के उत्तराधिकारी का चुनाव करेंगे। हालांकि उन्होंने दक्षिण फ्रांस के कई मध्यम आकार के क्षेत्रों में जीत हासिल की है, लेकिन तमाम भविष्यवाणियों के बावजूद वे किसी भी बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर पर कब्ज़ा नहीं कर पाए।

फ्रांस के लगभग 35,000 गांवों, कस्बों और नगर पालिकाओं में से अधिकांश ने पिछले सप्ताहांत के पहले चरण में ही अपने स्थानीय नेताओं को चुन लिया था, लेकिन लगभग 1,500 नगर पालिकाओं (कौम्यून्स) में मामला दूसरे दौर के रन-ऑफ मतदान तक पहुँचा था, जिसमें बड़े शहरी केंद्र शामिल थे।

राजधानी पेरिस में 48 वर्षीय सिविल सर्वेंट इमैनुएल ग्रेगोइरे की जीत ने शहर में समाजवादियों (सोशलिस्ट्स) के पिछले 25 वर्षों के शासन को और आगे बढ़ा दिया है। निवर्तमान मेयर ऐनी हिडाल्गो के डिप्टी रहे ग्रेगोइरे ने अपनी जीत का जश्न पेरिस की प्रतिष्ठित रेंटल साइकिल पर सवार होकर सिटी हॉल तक जाकर मनाया। उन्होंने उत्साहित भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, पेरिस ने अपने इतिहास के प्रति वफादार रहने का फैसला किया है। यह पेरिस जैसे 20 लाख की आबादी वाले शहर में समाजवादियों का लगातार पांचवां कार्यकाल है।