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अब चीन एयर की भी सीधी उड़ान प्रारंभ होगी

युद्ध की वजह से तेजी से बदल रहे हैं कूटनीतिक समीकरण

नईदिल्लीः भारत और चीन के बीच राजनयिक और व्यापारिक संबंधों में जमी बर्फ पिघलने के साथ ही विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। शनिवार को भारत में चीनी दूतावास ने घोषणा की कि एयर चाइना बीजिंग और नई दिल्ली के बीच अपनी सीधी उड़ान सेवाएं फिर से शुरू करने जा रही है।

दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने इस कदम का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह केवल यात्रा के बारे में नहीं है, बल्कि यह व्यापार, पर्यटन और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने इसे एससीओ और ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक और जन-संपर्क के लिए एक सकारात्मक संकेत करार दिया।

एयर चाइना की यह घोषणा भारत-चीन हवाई गलियारे के व्यापक पुनरुद्धार का हिस्सा है। इससे पहले, 1 फरवरी 2026 को एयर इंडिया ने दिल्ली और शंघाई के बीच लगभग छह साल के अंतराल के बाद अपनी सीधी उड़ानें फिर से शुरू की थीं। शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने इस बहाली का स्वागत करते हुए कहा था कि बेहतर हवाई संपर्क व्यापार, पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए अनिवार्य है। इसी क्रम में, भारतीय एयरलाइन इंडिगो ने भी 29 मार्च 2026 से कोलकाता और शंघाई के बीच सीधी दैनिक उड़ान शुरू करने की योजना बनाई है, जो पूर्वी भारत को चीन के वित्तीय केंद्र से जोड़ेगी।

हवाई सेवाओं की यह बहाली नवंबर 2025 में भारत द्वारा चीनी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को पूर्ण रूप से फिर से शुरू करने के बाद हुई है। साल 2020 में सीमा विवाद के कारण वीजा सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की थी कि अब चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक और व्यावसायिक दोनों प्रकार के वीजा की व्यवस्था पूरी तरह कार्यात्मक है। यह कदम 2024 के अंत में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त व्यवस्था को लेकर हुए समझौतों और उसके बाद 2025 में दोनों देशों के नेतृत्व के बीच हुई वार्ताओं का परिणाम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीधी उड़ानों की वापसी से न केवल यात्रा का समय और लागत कम होगी, बल्कि इससे फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। 2019 में कोविड से पहले, चीन भारत के लिए पर्यटकों का एक बड़ा स्रोत था। अब वीजा और उड़ानों के सुचारू होने से पर्यटन क्षेत्र में फिर से उछाल आने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच यह विमानन कूटनीति मध्य पूर्व और वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।