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प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात

होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों को छूट जारी

  • क्षेत्रीय शांति का रास्ता बनाने पर जोर

  • आठ दिनों के भीतर दूसरी बार बातचीत

  • ईद की बधाई के साथ ही कूटनीतिक प्रयास

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः शनिवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण टेलीफोनिक वार्ता की। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और अनिश्चितता के दौर में दोनों नेताओं के बीच पिछले आठ दिनों के भीतर यह दूसरी उच्च स्तरीय बातचीत है। यह बार-बार होने वाला संवाद इस बात का प्रमाण है कि भारत इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को कितनी गंभीरता से ले रहा है और वह शांति बहाली की प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस वार्ता का विवरण साझा करते हुए स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में नागरिक और सामरिक बुनियादी ढांचों पर होने वाले हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।

उनका मानना है कि बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बनता है, बल्कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी गंभीर चोट पहुँचती है। तेल और गैस की कीमतों में उछाल से लेकर रसद की लागत बढ़ने तक, इस हिंसा का प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। राजनयिक शिष्टाचार और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान को आगामी ईद और नौरोज़ की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।

भारत के लिए नौवहन की स्वतंत्रता केवल एक कूटनीतिक शब्द नहीं, बल्कि एक आर्थिक आवश्यकता है। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री रास्तों को खुला और सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। हिंद महासागर और फारस की खाड़ी के बीच का यह संकीर्ण रास्ता दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। किसी भी प्रकार की सैन्य बाधा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने ईरान में निवास करने वाले और वहां कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरानी सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की।

भारत का रुख हमेशा से ही संयम, संवाद और कूटनीति का रहा है। प्रधानमंत्री मोदी केवल ईरान ही नहीं, बल्कि इस संकट से जुड़े अन्य प्रमुख वैश्विक हितधारकों के साथ भी निरंतर संपर्क में हैं। हाल के दिनों में उनकी बहरीन के राजा हमाद बिन ईसा अल खलीफा, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से हुई चर्चाएं इसी बहुपक्षीय कूटनीति का हिस्सा हैं। भारत यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर लौटकर समाधान ढूंढना चाहिए।

वर्तमान परिदृश्य बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमलों की तीव्रता बढ़ाने की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए झुकने से इनकार कर दिया है। इस ध्रुवीकृत माहौल में, भारत एक ऐसी शक्ति के रूप में उभरा है जिसके संबंध इज़राइल, अमेरिका और ईरान—तीनों के साथ संतुलित हैं। भारत की यह तटस्थता और शांति की अपील वैश्विक भू-राजनीति में तनाव को कम करने वाला एक सुरक्षा वाल्व साबित हो सकती है।