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द्रोपदी मुर्मू ने प्रेमानंद महाराज से भेंट की

उत्तरप्रदेश की आध्यात्मिक यात्रा पर हैं देश की राष्ट्रपति

  • उनके लिए विशेष कुर्सी लगायी गयी

  • नीम करोली बाबा की स्मृति स्थल पर गयी

  • कैंसर उपचार के खास खंड का उदघाटन किया

राष्ट्रीय खबर

वृंदावनः भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय आध्यात्मिक प्रवास पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने अयोध्या और मथुरा के बाद पावन नगरी वृंदावन में दर्शन किए। शुक्रवार की सुबह राष्ट्रपति मुर्मू कड़े सुरक्षा घेरे के बीच प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचीं। यहाँ उन्होंने महाराज का आशीर्वाद लिया और दोनों के बीच आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता तथा जनकल्याण में विश्वास की भूमिका जैसे गहन विषयों पर लंबी चर्चा हुई। वहां राष्ट्रपति को सम्मान देने के लिए महाराज के सामने खास तौर पर कुर्सी लगायी गयी थी। आम तौ पर वहां आने वाले सभी भक्तों के लिए नीचे बैठने की व्यवस्था होती है।

राष्ट्रपति की इस यात्रा में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ जनसेवा के प्रकल्पों पर भी विशेष जोर दिया गया है। राधा केलि कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज के शिष्यों और गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया। चर्चा के बाद उन्होंने आश्रम की विभिन्न धार्मिक गतिविधियों का अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने विश्व प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा के स्मृति स्थल पर जाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

शाम को राष्ट्रपति मुर्मू ने वृंदावन में कैंसर के उन्नत उपचार के लिए नवनिर्मित ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया। यह कदम क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने भव्य राम मंदिर में दर्शन किए और वहाँ श्रीराम यंत्र की स्थापना की।

गुरुवार शाम को उन्होंने मथुरा के इस्कॉन मंदिर में संध्या आरती में भाग लिया और स्वामी प्रभुपाद की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने कृष्ण-बलराम और श्यामसुंदर मंदिर में प्रार्थना की। अपनी यात्रा के अंतिम चरण में 21 मार्च को राष्ट्रपति वात्सल्य ग्राम का दौरा करेंगी, जो अनाथ बच्चों के पालन-पोषण के लिए समर्पित है। इसके साथ ही वह पारंपरिक गोवर्धन परिक्रमा में भी सम्मिलित होंगी। यह यात्रा न केवल राष्ट्रपति की निजी आस्था को दर्शाती है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति उनके सम्मान को भी रेखांकित करती है।