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हजार किलोमीटर वाला चक्रवाती घेरा की आशंका

जलवायु परिवर्तन का दूसरा प्रतिकूल प्रभाव देख रहे वैज्ञानिक

  • हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का बदलाव

  • सिक्किम के इलाके में फंसे हैं पर्यटक

  • पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है प्रभाव

राष्ट्रीय खबर

सिलिगुड़ीः मार्च के अंत में जहां उत्तर भारत में गर्मी की आहट होने लगती है, वहीं इस बार प्रकृति का एक अलग और डरावना रूप देखने को मिल रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होता हुए लगभग 1000 किलोमीटर लंबा एक विशाल चक्रवाती घेरा भारत में प्रवेश कर चुका है। इसके प्रभाव से न केवल उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में समय से पहले मानसून जैसा माहौल बन गया है, बल्कि सिक्किम और पश्चिम बंगाल के ऊपरी हिस्सों में भारी बर्फबारी और बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

मौसम विभाग के अनुसार, यह चक्रवाती प्रणाली भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न हुई है, जो उत्तर-पश्चिम दिशा से भारत में दाखिल हुई है। इसके चलते सिक्किम और छांगू: लगातार हो रही बर्फबारी के कारण छांगू झील और आसपास के इलाकों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। पर्यटक और स्थानीय लोग फंसे हुए हैं। उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और जलपाईगुड़ी जैसे जिलों में मूसलाधार बारिश जारी है, जिससे तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले दो-तीन दिनों में देश के एक बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज और बिगड़ेगा।

दक्षिण भारत के कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना है। दिल्ली में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधियां चल सकती हैं, जबकि कोलकाता में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ ओले गिरने का अनुमान है। मध्य भारत में कम तीव्रता वाले चक्रवात बनने की आशंका है, जो कृषि और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

मार्च के महीने में इस तरह का चक्रवाती प्रभाव मौसम विज्ञानियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की जलवायु तेजी से बदल रही है। पश्चिमी विक्षोभ की कार्यक्षमता और इसकी अवधि में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी इसी संकट से जूझ रहे हैं। पिछले साल पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़ और अफगानिस्तान में हुई मौतों के बाद, वर्तमान ओलावृष्टि और चक्रवात आने वाले दिनों में एक बड़ी त्रासदी का संकेत दे रहे हैं। यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो दक्षिण एशिया के इन हिस्सों में दोबारा भयावह बाढ़ और तबाही की स्थिति बन सकती है।