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PM Modi on Middle East Crisis: पीएम मोदी का बड़ा ‘डिप्लोमैटिक’ एक्शन, फ्रांस-ओमान समेत कई देशों के प्रमुखों से की बात; शांति और स्थिरता पर जोर

मिडिल ईस्ट में जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ओमान, फ्रांस और मलेशिया के नेताओं के साथ बातचीत की. बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया. पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ बात की. पीएम मोदी ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि मेरे भाई सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ अच्छी बातचीत हुई और ओमान के लोगों को ईद की एडवांस बधाई दी.

उन्होंने लिखा कि हम इस बात पर सहमत हुए कि तनाव कम करने और उसके बाद शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

पीएम मोदी ने लिखा कि ओमान की सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी के उल्लंघन की भारत की निंदा दोहराई और भारतीय नागरिकों समेत हजारों लोगों की सुरक्षित वापसी में मदद करने के लिए ओमान की कोशिशों की तारीफ की. भारत और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और फ्री नेविगेशन के पक्ष में हैं.

पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति से की बात

पीएम मोदी ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी बातचीत की. पीएम मोदी ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि अपने प्यारे दोस्त, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से वेस्ट एशिया के हालात और तनाव कम करने की तुरंत जरूरत, साथ ही बातचीत और डिप्लोमेसी पर लौटने पर बात की.

उन्होंने लिखा कि हम इस इलाके और उससे आगे शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए अपना करीबी तालमेल जारी रखने की उम्मीद करते हैं.

पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री से की बात

पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भी बात की और उन्हें और मलेशिया के लोगों को हरि राया एदिलफित्री की बधाई दी. पीएम मोदी ने लिखा कि मैंने अपने दोस्त, मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम से बात की और उन्हें और मलेशिया के लोगों को आने वाले हरि राया एदिलफित्री त्योहार की हार्दिक शुभकामनाएं दीं. हमने वेस्ट एशिया की बहुत चिंताजनक स्थिति पर भी चर्चा की और बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए तनाव कम करने और शांति और स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करने के अपने साझा वादे को दोहराया.

ये डिप्लोमैटिक बातचीत पश्चिम एशिया में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री रास्ते और मानवीय बातों की वकालत करने में भारत की सक्रिय भूमिका को दिखाती है.