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सरकार के दावों से मेल नहीं खा रही देश में बेरोजगारी की हालत

स्नातक बेरोजगारी की अब गंभीर स्थिति

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः एक नई और महत्वपूर्ण रिपोर्ट के अनुसार, भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश अपने चरम पर पहुंच रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वर्ष 2030 के बाद भारत की कार्यशील आयु वाली जनसंख्या का हिस्सा कम होना शुरू हो जाएगा। हालांकि पिछले चार दशकों में युवाओं के शिक्षा स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 की यह रिपोर्ट स्नातक युवाओं के बीच व्याप्त उच्च बेरोजगारी दर की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु के स्नातकों के लिए शिक्षा पूरा करने के बाद रोजगार प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। श्रम शक्ति में शामिल लगभग 40 प्रतिशत स्नातक खुली बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। आयु वर्ग के अनुसार आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। 15-25 वर्ष का आयु वर्ग में 40 फीसद स्नातक बेरोजगार हैं। 25-29 वर्ष का आयु वर्ग: इस समूह में बेरोजगारी की दर 20 प्रतिशत है।

रिपोर्ट केवल बेरोजगारी ही नहीं, बल्कि मिलने वाले रोजगार की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाती है। आंकड़ों के अनुसार:

स्नातक होने के एक वर्ष के भीतर लगभग 51.2 फीसद पुरुष किसी न किसी प्रकार का काम ढूंढ लेते हैं। हालांकि, केवल 4.6 प्रतिशत को ही स्नातक होने के एक साल के भीतर स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है। प्रतिष्ठित कार्यालयी नौकरियों के मामले में यह आंकड़ा और भी कम, मात्र 2 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि स्नातक बेरोजगारी की समस्या हाल के वर्षों में इसलिए और अधिक विकराल हुई है क्योंकि स्नातक करने वाले युवाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक 20 से 29 वर्ष की आयु के कुल 6.3 करोड़ स्नातकों में से 1.1 करोड़ स्नातक बेरोजगार थे। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है; बाजार की मांग और युवाओं के कौशल के बीच एक बड़ा अंतर (Skill Gap) मौजूद है जिसे पाटना भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।