Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अत्यधिक ताप सहने वाला नया चिप तैयार Bengal Election 2026: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, इस सीट से TMC उम्मीदवार का नामांकन रद्द; जानें अब कि... Mathura Boat Accident Video: मौत से चंद लम्हे पहले 'राधे-राधे' का जाप कर रहे थे श्रद्धालु, सामने आया... पाकिस्तान: इस्लामाबाद में अघोषित कर्फ्यू! ईरान-यूएस पीस टॉक के चलते सुरक्षा सख्त, आम जनता के लिए बुन... Anant Ambani Guruvayur Visit: अनंत अंबानी ने गुरुवायुर मंदिर में किया करोड़ों का दान, हाथियों के लिए... पश्चिम बंगाल चुनाव: बीजेपी का बड़ा दांव! जेल से रिहा होते ही मैदान में उतरा दिग्गज नेता, समर्थकों ने... Nashik News: नासिक की आईटी कंपनी में महिलाओं से दरिंदगी, 'लेडी सिंघम' ने भेष बदलकर किया बड़े गिरोह क... EVM Probe: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पहली बार दिया EVM जांच का आदेश; जानें मुंबई विधानसभा ... Rajnath Singh on Gen Z: 'आप लेटेस्ट और बेस्ट हैं', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Gen Z की तारीफ में पढ... SC on Caste Census: जाति जनगणना पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को फटकार लगा CJI...

ड्रोन युद्ध के उदय से लेजर प्रणालियों पर ध्यान

यूक्रेन और ईरान के घटनाक्रमों ने सोचने पर विवश किया

कोलोरॉडोः दुनिया भर के संघर्षों में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल ने, जिसे यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों में सबसे स्पष्ट रूप से देखा गया है, उच्च-शक्ति वाली लेजर प्रणालियों को विकसित करने की होड़ तेज कर दी है। ये आधुनिक प्रणालियाँ पारंपरिक रक्षात्मक हथियारों की तुलना में बहुत कम लागत पर ड्रोन को मार गिराने में सक्षम हैं। उन सरकारों के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन गया है जो कम लागत वाले और आसानी से उपलब्ध होने वाले ड्रोनों से खतरे का सामना कर रही हैं। ये छोटे ड्रोन भारी विनाश करने की क्षमता रखते हैं, जिन्हें वर्तमान में अक्सर केवल सबसे उन्नत और महंगी मिसाइल प्रौद्योगिकियों द्वारा ही नष्ट किया जाता है।

वर्तमान में, निर्देशित ऊर्जा हथियार के रूप में जानी जाने वाली इन प्रणालियों को जहाजों या बख्तरबंद वाहनों पर लगाया जा सकता है। ये हथियार 20 किलोमीटर (12 मील) की दूरी तक के लक्ष्यों पर एक केंद्रित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बीम दाग सकते हैं। कोलोराडो विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी इनिशिएटिव्स के निदेशक इयान बॉयड के अनुसार, इन प्रणालियों ने पिछले 10 से 15 वर्षों में बहुत प्रगति की है। रूस पहले से ही यूक्रेन के ड्रोनों के खिलाफ इसके कई संस्करणों का उपयोग कर रहा है, जबकि यूक्रेन भी अपनी स्वयं की प्रणाली का परीक्षण कर रहा है।

वहीं दूसरी ओर, इज़राइल ने लेबनान के ईरान समर्थित उग्रवादी समूह हिजबुल्लाह द्वारा दागे गए ड्रोनों के खिलाफ राफेल की आयरन बीम तकनीक तैनात की है। हालांकि, इज़राइली सेना ने पिछले हफ्ते द जेरूसलम पोस्ट को पुष्टि की कि ईरान के साथ मौजूदा युद्ध में आयरन बीम का पूर्ण उपयोग नहीं किया जा रहा है, क्योंकि यह अभी नियमित उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। वैश्विक स्तर पर देखें तो चीन ने पिछले सितंबर में अपनी एलवाई -1 प्रणाली पेश की थी, जबकि ब्रिटेन और फ्रांस अपने स्वयं के संस्करण विकसित कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी विशेष रूप से अपने युद्धपोतों को लॉकहीड मार्टिन के हेलिओस या नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के इस तकनीक से लैस करना शुरू कर दिया है।

नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ने एक बयान में कहा कि यह तकनीक सैन्य अभियानों और घरेलू रक्षा सहित व्यापक अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त साबित हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वर्तमान लेजर तकनीक अविश्वसनीय है और जल्द ही यह ड्रोनों को मार गिराने के लिए पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल की जगह ले लेगी। लेजर हथियारों का सबसे बड़ा आकर्षण उनकी बेहद कम परिचालन लागत है। जहाँ एक मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है, वहीं लेजर का एक शॉट मात्र कुछ पैसों या बिजली की मामूली लागत में पूरा हो जाता है।