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गजब का खेल! गरीब के ‘पीएम आवास’ पर प्रशासन का कब्जा; मकान मालिक बाहर और घर के अंदर खुल गया आंगनबाड़ी केंद्र, जानें पूरा मामला

मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है पीएम आवास योजना. केंद्र सरकार की कोशिश है कि हर गरीब और जरूरतमंद को उसका पक्का मकान मिले, गरीबों के जीवनस्तर में सुधार आए. छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर लोगों को पीएम आवास योजना का लाभ मिला है. केंद्र और राज्य की कोशिश है कि बाकी बचे गरीबों को भी जल्द से जल्द पक्का मकान मिल जाए, इसके लिए लगातार काम भी जारी है. लेकिन भरतपुर विकासखंड में एक शख्स ऐसा भी है, जिसके पीएम आवास में उसका अपना आशियान नहीं बल्कि आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है, वो भी पिछले 2 सालों से. ये गंभीर आरोप लोग लगा रहे हैं. ग्राम पंचायत के सरपंच पति गुलाब भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि पीएम आवास में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है.

पीएम आवास में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र

भरतपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत कसौड़ा में पिछले 2 सालों से आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पीएम आवास योजना के तहत बने मकान में किया जा रहा है. जिस मकान का निर्माण गरीब हितग्राही के लिए किया गया था, उस मकान में आंगनबाड़ी केंद्र खुला है. जिस हितग्राही का मकान है वो आंगनबाड़ी केंद्र से थोड़ी दूरी पर रहता है. हितग्राही को आज भी अपने पीएम आवास योजना का मकान मिलने का इंतजार है. सरपंच पति खुद बता रहे हैं कि जिसको मकान आवंटित हुआ है वो यहां नहीं रहता बल्कि यहां आंगनबाड़ी केंद्र चलता है.

ब्लॉक मुख्यालय से 40 किमी दूर है ग्राम पंचायत कसौड़ा

ग्राम पंचायत कसौड़ा ब्लॉक मुख्यालय से करीब 40 से 45 किमी दूर है. यहां पर ज्यादातर गरीब परिवारों के लोग रहते हैं. पिछड़ा इलाका होने के चलते गरीब भी ज्यादा है. गांव वाले बताते हैं कि यहां पर जो पहले आंगनबाड़ी केंद्र था उसकी छत छतिग्रस्त हो गई. जिसके बाद बच्चों को वहां से हटा दिया गया और इस मकान में शिफ्ट कर दिया गया. ये मकान पीएम आवास योजना के हितग्राही को आवंटित था. आंगनबाड़ी केंद्र के लिए मकान नहीं होने के चलते इसमें आंगनबाड़ी खोला गया. वर्तमान में यहां पर 40 के करीब बच्चे पढ़ने आते हैं, जबकि 22 बच्चों के नाम विधिवत रजिस्टर में दर्ज हैं. अभी खेती बाड़ी का सीजन चल रहा है ऐसे में ज्यादातर बच्चे घरेलू काम में लगे हैं, इसलिए आंगनबाड़ी आने वाले बच्चों की संख्या कम है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बताती हैं कि यहां बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाया लिखाया जाता है. बच्चों के पोषण का भी पूरा ध्यान रखा जाता है.

आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों की क्लास लग रही है. बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ये किया जा रहा है. वर्तमान में 40 बच्चे यहां पढ़ रहे हैं: चिंता सिंह, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

हमने आवेदन दिया था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. विधायक जी की ओर से भी कोई मदद नहीं की गई. पुराने आंगनबाड़ी भवन की छत टूट गई थी. जिसके बाद यहां पर बच्चों को पढ़ाने का काम किया जा रहा है. करीब 2 साल से यहीं पर आंगनबाड़ी भवन चल रहा है. जिसका ये आवास है वो बेचारा बगल में यहीं पर रहता है. जगह नहीं होने पर हम क्या करते, यहीं पर बच्चों को बुलाकर पढ़वाते हैं: गुलाब, सरपंच पति

शासन और जनप्रतिनिधियों से मांग

ग्राम पंचायत के सरपंच पति गुलाब का कहना है कि गांव में अलग से आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के लिए कई बार संबंधित विभाग को लिखित आवेदन दिया जा चुका है. लेकिन कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की आवश्यकता तो है, लेकिन किसी गरीब के प्रधानमंत्री आवास में इसे चलाना उचित नहीं है. इससे न केवल हितग्राही अपने घर से वंचित है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में स्थायी आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत कर निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था भी प्रभावित न हो तथा प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही को भी उसका घर मिल सके.