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ओम बिड़ला के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के पहले ही घमासान

ईरान युद्ध पर बयान देने से सरकार का इंकार

  • जयशंकर ने अपना लिखित भाषण पढ़ा

  • विपक्ष ने कहा खुलकर इसपर चर्चा हो

  • सरकार ने कहा बात चीत से किया इंकार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज अत्यंत हंगामेदार रहा। राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही सदनों में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गतिरोध का मुख्य केंद्र विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा ईरान युद्ध और मध्य-पूर्व के मौजूदा संकट पर दिया गया वक्तव्य रहा। जैसे ही विदेश मंत्री ने अपनी बात रखनी शुरू की, विपक्षी सांसदों ने तख्तियां लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही में भारी बाधा उत्पन्न हुई।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने मध्य-पूर्व के तनाव और ईरान युद्ध पर संसद में विस्तृत चर्चा की विपक्ष की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। सरकार का तर्क है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों पर इस समय इस तरह की चर्चा कूटनीतिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार वैश्विक संकटों पर देश की स्थिति स्पष्ट करने से बच रही है।दूसरी तरफ सरकार पर पहले से ही यह आरोप लग चुका है कि वह अमेरिका के दबाव में सरकार की विदेश  नीति की धज्जियां उड़ा रही है। जिससे देश के पुराने सहयोगी आहत हो रहे है। यह रवैया भारत के लिए कतई ठीक नहीं है।

सदन में तनाव का एक अन्य बड़ा कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव है। विपक्ष ने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान ही अध्यक्ष को हटाने के लिए एक नोटिस दिया था, जिस पर उस समय 118 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। गौरतलब है कि शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, लेकिन अब उन्होंने भी इस अविश्वास प्रस्ताव को अपना पूर्ण समर्थन दे दिया है। विपक्ष की यह एकजुटता सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी विधायी चुनौती पेश कर सकती है।

संसदीय सूत्रों ने संकेत दिया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के संकल्प पर चर्चा कल दोपहर 12 बजे शुरू होने की संभावना है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर चुका है। वर्तमान बजट सत्र 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, लेकिन जिस तरह की तनातनी दिख रही है, उससे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के पूरा होने पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। सदन में बढ़ते शोर-शराबे और असहयोग के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कैसे करती है।