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तमिलनाडु में डिजिटल जनगणना 2027 का शंखनाद

चुनावी सरगर्मियों के बीच ही स्टालिन सरकार की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए महत्वपूर्ण तिथियों और रूपरेखा की घोषणा कर दी है। सार्वजनिक सचिव रीता हरीश ठक्कर द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्य में स्व-गणना का अभ्यास 17 जुलाई से 31 जुलाई तक 15 दिनों के लिए चलेगा।

इसके तत्काल बाद, 1 अगस्त से 30 अगस्त तक मकानों की सूची बनाने का कार्य संचालित किया जाएगा। भारत की दशकीय जनगणना के इतिहास में यह एक युगांतकारी मोड़ है, क्योंकि पहली बार पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संपन्न किया जा रहा है, जो पारंपरिक कागजी कार्यवाही की जगह लेगा।

भारत में दशकीय जनगणना दो मुख्य चरणों में विभाजित होती है। पहला चरण, जिसे हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस कहा जाता है, बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश भर के हर भवन, घर और परिवार को व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध करना है। यह प्रक्रिया केवल घरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह जनसंख्या गणना के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करती है।

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित उन 33 प्रश्नों की सूची को भी पुनः प्रकाशित किया है, जो इस चरण के दौरान आम जनता से पूछे जाएंगे। ये प्रश्न केवल व्यक्तिगत जानकारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार के जीवन स्तर और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत विवरण भी एकत्र करेंगे।

जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले 33 प्रश्नों में मकान की स्थिति, रोशनी का मुख्य स्रोत, शौचालय तक पहुँच, स्नान की सुविधा, टेलीविजन, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। इसके अलावा, संचार के साधनों (टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन) और परिवहन के साधनों (दोपहिया/चार पहिया वाहन) के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी।

पीने के पानी का स्रोत और क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणियों से संबंधित है, यह डेटा भी एकत्र किया जाएगा। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और बजट आवंटन को सटीक रूप से लक्षित करने के लिए किया जाएगा।

डिजिटल जनगणना की ओर यह बदलाव डेटा की शुद्धता और प्रसंस्करण की गति को बढ़ाने के लिए किया गया है। 2027 की जनगणना के लिए प्रारंभिक परीक्षण पहले ही 10 से 30 नवंबर, 2025 के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। यह परीक्षण तिरुवल्लूर जिले के आरके पेट तालुक (ग्रामीण), कांचीपुरम जिले के मांगडू नगर पालिका के 27 वार्डों (शहरी) और कृष्णागिरी जिले के अंचेटी तालुक (ग्रामीण) में किया गया था।

इन परीक्षणों के परिणामों के आधार पर अब पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर डिजिटल प्रविष्टि सुनिश्चित की जाएगी। यह डिजिटल डेटाबेस न केवल जनसांख्यिकीय बदलावों को समझने में मदद करेगा, बल्कि तमिलनाडु के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को भी नई दिशा प्रदान करेगा।