Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अत्यधिक ताप सहने वाला नया चिप तैयार Bengal Election 2026: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, इस सीट से TMC उम्मीदवार का नामांकन रद्द; जानें अब कि... Mathura Boat Accident Video: मौत से चंद लम्हे पहले 'राधे-राधे' का जाप कर रहे थे श्रद्धालु, सामने आया... पाकिस्तान: इस्लामाबाद में अघोषित कर्फ्यू! ईरान-यूएस पीस टॉक के चलते सुरक्षा सख्त, आम जनता के लिए बुन... Anant Ambani Guruvayur Visit: अनंत अंबानी ने गुरुवायुर मंदिर में किया करोड़ों का दान, हाथियों के लिए... पश्चिम बंगाल चुनाव: बीजेपी का बड़ा दांव! जेल से रिहा होते ही मैदान में उतरा दिग्गज नेता, समर्थकों ने... Nashik News: नासिक की आईटी कंपनी में महिलाओं से दरिंदगी, 'लेडी सिंघम' ने भेष बदलकर किया बड़े गिरोह क... EVM Probe: बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पहली बार दिया EVM जांच का आदेश; जानें मुंबई विधानसभा ... Rajnath Singh on Gen Z: 'आप लेटेस्ट और बेस्ट हैं', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Gen Z की तारीफ में पढ... SC on Caste Census: जाति जनगणना पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को फटकार लगा CJI...

नेपाल में जेन-जी क्रांति का राजनीतिक भय अब भी कायम है

दो पूर्व प्रधानमंत्रियों ने चुनाव न लड़ने का एलान किया

काठमांडूः नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की बयार बह रही है। पिछले साल हुए जेन-जी नेतृत्व वाले जन-आंदोलन के बाद उपजे दबाव के कारण देश के दो सबसे प्रभावशाली राजनेता—पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और झलनाथ खनाल—ने आगामी 5 मार्च को होने वाले चुनाव से बाहर रहने का निर्णय लिया है। भारतीय समाचार माध्यम टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 90 के दशक में लोकतंत्र की बहाली के बाद यह पहली बार है जब ये दोनों दिग्गज नेता अपनी पारंपरिक सीटों से चुनावी मैदान में नहीं होंगे।

पाँच बार प्रधानमंत्री रह चुके नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा 1991 से लगातार दादेलधुरा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उत्तराखंड सीमा से सटा यह क्षेत्र पिछले 40 वर्षों से उनका अभेद्य किला माना जाता था। हालांकि, पार्टी के भीतर पुनर्गठन और टिकट आवंटन को लेकर चले लंबे विवादों के बाद, देउबा ने खुद चुनाव न लड़ने की घोषणा की, जिसने नेपाली कांग्रेस के समर्थकों को सकते में डाल दिया है।

युवाओं के लिए जगह खाली करने का तर्क दूसरी ओर, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल, जो पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इलम निर्वाचन क्षेत्र का दशकों से प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने अपने नेतृत्व को सूचित किया है कि अब वे नई पीढ़ी के नेताओं को अवसर देना चाहते हैं।

नेपाल की राजनीति में यह बदलाव सितंबर 2025 में हुए भीषण जन-विद्रोह की परिणति है। 19 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद भड़के इस आंदोलन ने देखते ही देखते एक राष्ट्रव्यापी जन-अभ्युत्थान का रूप ले लिया। स्थिति इतनी भयावह थी कि जनता ने कर्फ्यू तोड़कर राजनीतिक नेताओं के आवासों पर हमले किए।

उस दौरान शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा के साथ मारपीट की खबरें आईं, और सोशल मीडिया पर उनकी घायल तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। उनके घर को आग के हवाले कर दिया गया था। इसी तरह, इलम में झलनाथ खनाल के घर पर भी उग्र भीड़ ने हमला किया था।

उस दौर में हालात इतने बिगड़ गए थे कि कई मंत्रियों को जान बचाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था। कई नेता अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागने पर मजबूर हुए थे। आज का यह चुनावी फैसला उसी जेन-जी क्रांति के बाद बने राजनीतिक दबाव का सीधा परिणाम है।