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‘पसीने से तरबतर और रोता रहा’: नोएडा एमिटी स्कूल बस में 6 घंटे फंसा रहा बच्चा, जानें क्या बोलीं प्रिंसिपल

नोएडा से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां सेक्टर 44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में यूकेजी के एक मासूम छात्रा को स्कूल ट्रांसपोर्ट की भारी लापरवाही का सामना करना पड़ा. गुरुवार सुबह बच्चों को रोज की तरह स्कूल बस में बैठाया गया. इस बीच, बच्चा गाड़ी में ही सो गया. तभी बस खराब हो गई. फिर बच्चों को दूसरी बस में शिफ्ट किया गया. इस शिफ्टिंग में सो रहे बच्चे पर किसी का ध्यान नहीं गया. बाद में खराब बस को लेकर स्कूल से करीब 25 किलोमीटर दूर एक सुनसान पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया गया. इस दौरान बच्चा बस के अंदर लगभग 6 घंटे बंद रहा.

दरअसल, दोपहर में जब स्कूल की छुट्टी हुई तो मां बच्चे को लेने स्टैंड पर पहुंची लेकिन बच्चा वहां मौजूद नहीं था. स्कूल प्रशासन से संपर्क करने पर पहले स्पष्ट जवाब नहीं मिला, काफी खोजबीन और फोन कॉल के बाद बच्चे को नोएडा के सुनसान इलाके में खड़ी बस से बरामद किया गया. परिजनों के अनुसार, बच्चा पसीने से भीगा हुआ था और वह बहुत बुरी तरीके से रो रहा था. बच्चा पूरी तरह से घबराया हुआ था. गनीमत रही की कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ वरना स्थिति और भयावह हो सकती थी.

मां ने लिखा लेटर

घटना के बाद पीड़ित बच्चे की मां एक भावुक लेटर लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्ति की. उन्होंने लिखा कि सुबह उन्होंने खुद अपने बेटे को बस में बैठाया था और उसे हाथ हिलाकर विदा किया था. दोपहर में जब मैं वापस आई तो बच्चा स्कूल में ही नहीं था. मां का आरोप है कि स्कूल की ओर से उन्हें बच्चों की अनुपस्थिति की कोई सूचना नहीं दी गई. जबकि क्लास रजिस्टर में बच्चों को अनुपस्थिति दर्ज कर दिया गया. बस अटेंडेंस रजिस्टर में उसकी उपस्थिति दर्ज थी, जिसे लापरवाही और भी स्पष्ट हो जाती है. उन्होंने लिखा कि कई घंटे तक वे और उनका परिवार डर में रहा. आखिरकार बच्चा बस पार्किंग यार्ड में मिला मां ने सवाल उठाया कि यदि बच्चे के साथ कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?

स्कूल प्रबंधन की चूक या सिस्टम की विफलत

इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आमतौर पर बस से उतरते समय ड्राइवर और कंडक्टर की जिम्मेदारी होती है कि वह बस की जांच करें. इसके अलावा स्कूल प्रशासन को भी उपस्थित की निगरानी करनी चाहिए थी. सवाल यह भी है कि जब बच्चा क्लास में नहीं पहुंचा तो स्कूल ने तत्काल अभिभावकों को सूचित क्यों नहीं किया. यदि समय रहते जानकारी दी जाती तो बच्चा घंटों तक बस में बंद नहीं रहता.

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

परिवार ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि दोषी बस स्टाफ और संबंधित जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बच्चे के साथ ऐसी घटना दोबारा ना हो. यह घटना केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए चेतावनी है. बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. गनीमत रही कि बच्चा सुरक्षित मिल गया. वहीं पुुलिस की तरफ से कहा गया इस मामले में बच्चे के परिजनों की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी.

स्कूल की प्रिंसिपल ने क्या कहा?

इस पूरी घटना के बाद जब स्कूल की प्रिंसिपल रेणु सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बस की खराबी के चलती अचानक से बस को बदलना पड़ गया और सभी बच्चों को दूसरी बस में शिफ्ट करके स्कूल लाया गया, लेकिन वह बच्चा किन कारणों से बस में रह गया इसकी जांच की जा रही है. परिवहन प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है. जवाबदेही के लिए सख्त और उचित कार्रवाई की जाएगी.