पाकिस्तान की अफगानिस्तान सीमा पर एयरस्ट्राइक
काबुलः दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव उस समय अपने चरम पर पहुँच गया, जब पाकिस्तान वायुसेना ने आज तड़के अफगान सीमा के भीतर घुसकर भीषण हवाई हमले किए।
यह सैन्य कार्रवाई मुख्य रूप से अफगानिस्तान के पक्तिका और खोस्त प्रांतों को निशाना बनाकर की गई है। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के उद्देश्य से चलाया गया था। पाकिस्तान का आरोप है कि हाल के हफ्तों में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों पर हुए घातक हमलों की योजना इन्हीं ठिकानों से बनाई गई थी।
इस्लामाबाद का दावा है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद, तालिबान प्रशासन अपनी धरती का उपयोग पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए होने दे रहा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला पाकिस्तान की उस नई आक्रामक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अब सीमा पार जाकर आतंकवाद के स्रोतों को खत्म करने की नीति अपना रहा है।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान पर नागरिक बस्तियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। शुरुआती रिपोर्टों और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की जान गई है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
तालिबान ने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया है। मुजाहिद ने चेतावनी देते हुए कहा, पाकिस्तान की यह अदूरदर्शी और आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को उस मोड़ पर ले जा सकती है, जहाँ से वापसी संभव नहीं होगी। इसके परिणाम पाकिस्तान के लिए असहनीय होंगे।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 3:00 बजे आसमान में लड़ाकू विमानों की गूँज सुनाई दी, जिसके तुरंत बाद भीषण धमाकों से पूरा इलाका दहल गया। हमले के बाद से ही सीमा के दोनों ओर भारी गोलाबारी शुरू होने की खबरें हैं, जिससे स्थानीय आबादी के बीच दहशत का माहौल है और एक नए शरणार्थी संकट का खतरा मंडराने लगा है। वर्तमान में, दोनों देशों ने अपनी सीमाओं पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों की तैनाती कर दी गई है। यदि कूटनीतिक स्तर पर इस तनाव को तुरंत कम नहीं किया गया, तो यह छिटपुट सैन्य टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।