Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
राजमुंदरी सामूहिक आत्महत्या मामला: सुसाइड नोट में ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव का आरोप, मां-... महाराष्ट्र कार्य संचालन नियम 2026 संशोधित: CM किसी भी विभाग से मंगा सकेंगे फाइलें, मुख्य सचिव को भी ... पानीपत के सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन कक्ष में बीमार महिला से छेड़छाड़, पीजीआई में मौत हरिद्वार कांवड़ मेले में डीजे के शोर से भारी ध्वनि प्रदूषण, तीर्थनगरी छोड़ भागे पक्षी अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी केस: ट्रस्ट को सौंपी गई SIT की अंतिम रिपोर्ट, पूर्व ट्रस्टी के दो करीबिय... आजम खान के 10 ठिकानों पर ED की बड़ी कार्रवाई: जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस... देश में मॉनसून का विकराल रूप: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन से कई राज्यों में भारी बारिश, IMD का अ... भाषण से भरोसा अब नहीं आ पायेगा व्हाइट हेलमेट बचावकर्मी की हिरासत में मौत की जांच प्रारंभ तेलचट्टों ने देश की सोच ही बदल डाली है

अंटार्कटिका के जमते समंदर में दिखी शार्क, देखें वीडियो

पहले की वैज्ञानिक सोच फिर से गलत साबित हुई

शेटलैंडः अंटार्कटिका की जमा देने वाली गहराइयों से एक ऐसी खबर आई है जिसने समुद्री जीव विज्ञानियों को हैरान कर दिया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार दक्षिण ध्रुव के पास शून्य के करीब तापमान वाले पानी में एक विशाल शार्क को कैमरे में कैद किया है। यह खोज इसलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि अब तक यह माना जाता था कि अंटार्कटिका की भीषण ठंड में शार्क का जीवित रहना असंभव है।

माइंडरो-यूडब्ल्यूए डीप-सी रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने जनवरी 2025 में एक विशेष अभियान के दौरान यह वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। दक्षिण शेटलैंड द्वीप समूह के पास लगभग 490 मीटर (1,608 फीट) की गहराई में एक स्लीपर शार्क को बेहद शांत गति से तैरते हुए देखा गया। इस शार्क की लंबाई करीब 10 से 13 फीट (3 से 4 मीटर) अनुमानित की गई है।

देखें इसका वीडियो

इस शोध दल के निदेशक एलन जैमिसन के अनुसार, वे वहां शार्क की तलाश में नहीं गए थे क्योंकि विज्ञान का एक पुराना नियम रहा है कि अंटार्कटिका के पानी में शार्क नहीं पाई जातीं। जैमिसन ने इस जीव को एक विशाल टैंक जैसा बताया, जो किसी भारी भरकम बैरल की तरह धीरे-धीरे समुद्र तल पर आगे बढ़ रहा था। जिस स्थान पर यह शार्क दिखी, वहां पानी का तापमान मात्र 1.27 डिग्री सेल्सियस था।

वैज्ञानिक अब इस खोज के पीछे दो मुख्य संभावनाएं देख रहे हैं। वैश्विक स्तर पर समुद्रों का तापमान बढ़ रहा है, जिससे संभव है कि ये शार्क ठंडे दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर पलायन कर रही हों। एक अन्य संभावना यह भी है कि स्लीपर शार्क हमेशा से वहां मौजूद रही हों, लेकिन अंटार्कटिका की सुदूरता और साल के 75% समय वहां शोध कार्य असंभव होने के कारण वे कभी कैमरे में नहीं आ पाईं।

ये शार्क मुख्य रूप से समुद्र की सतह पर मृत व्हेल, विशाल स्क्विड और अन्य जीवों के अवशेषों को खाकर जीवित रहती हैं। यह खोज न केवल हमारे अंटार्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के ज्ञान को चुनौती देती है, बल्कि यह भी बताती है कि गहरे समंदर में अभी भी कितने रहस्य दफन हैं।