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शिनवात्रा युग अब थाईलैंड में समाप्ति की ओर

रूढ़िवादी गठबंधन के लोग अब चुनाव में आगे बढ़ रहे हैं

बैंकॉकः थाईलैंड की राजनीति में पिछले दो दशकों से चला आ रहा शिनवात्रा युग अब अपने अवसान की ओर है। मैनचेस्टर सिटी के पूर्व मालिक और अरबपति नेता थाक्सिन शिनवात्रा, जिन्होंने कभी थाईलैंड की सत्ता पर एकछत्र राज किया था, आज जेल की सलाखों के पीछे हैं। हालिया चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि थाईलैंड का शक्तिशाली रूढ़िवादी एस्टेब्लिशमेंट (सेना, राजशाही और व्यापारिक संभ्रांत वर्ग) अंततः इस राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ने में सफल रहा है।

एक पूर्व पुलिस अधिकारी से अरबपति व्यवसायी बने थाक्सिन शिनवात्रा ने 2001 में राजनीति में प्रवेश कर थाईलैंड का परिदृश्य बदल दिया था। उनकी लोकलुभावन नीतियों, जैसे कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा और किसानों के लिए सब्सिडी ने उन्हें ग्रामीण इलाकों में मसीहा बना दिया। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि 2001 से लगभग हर चुनाव में उनके सहयोगियों ने जीत दर्ज की।

हालांकि, उनकी यही बढ़ती शक्ति थाईलैंड के पुराने रसूखदार वर्ग के लिए खतरा बन गई। नतीजतन, 2006 में सैन्य तख्तापलट के जरिए उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया। इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते वे 15 साल तक निर्वासन में रहे, लेकिन विदेश में रहकर भी वे अपनी पार्टी फ्यू थाई के जरिए थाई राजनीति की धुरी बने रहे।

2023 में थाक्सिन का स्वदेश लौटना एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का हिस्सा माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने जेल की सजा कम कराने के लिए अपने पुराने दुश्मनों (सेना समर्थित गुटों) के साथ एक गुप्त समझौता किया। इस समझौते के तहत, उनकी पार्टी फ्यू थाई ने उन सैन्य दलों के साथ गठबंधन किया जिन्होंने पहले शिनवात्रा परिवार को सत्ता से हटाया था।

इस कदम ने उनके कट्टर समर्थकों, जिन्हें रेड शर्ट्स कहा जाता है, को गहरे सदमे में डाल दिया। जनता को लगा कि थाक्सिन ने व्यक्तिगत स्वार्थ और जेल से बचने के लिए अपने सिद्धांतों और समर्थकों के साथ समझौता कर लिया है।

हाल के आम चुनावों में फ्यू थाई का प्रदर्शन अब तक का सबसे खराब रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि थाक्सिन के अपने गृहनगर और गढ़ माने जाने वाले चियांग माई में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पतन की अंतिम कड़ी तब जुड़ी जब थाक्सिन की बेटी और प्रधानमंत्री पेतोंगटार्न शिनवात्रा को पिछले साल नैतिक उल्लंघन के आरोप में पद से हटा दिया गया।

आज थाक्सिन जेल में हैं और उनकी पार्टी एक छोटे क्षेत्रीय दल में सिमटती दिख रही है। विश्लेषकों का कहना है कि थाई जनता अब केवल पुरानी यादों या किसी वंश के आधार पर वोट देने को तैयार नहीं है। हाउस (स्थापित सत्ता) ने दिखा दिया है कि अंततः जीत उसी की होती है।