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चुनाव आयोग ने 7 अधिकारियों को किया निलंबित

पश्चिम बंगाल  की मतदाता सूची संशोधन में लापरवाही

  • अफसरों पर पद का दुरुपयोग का आरोप

  • इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए

  • राज्य सरकार के साथ विवाद जारी

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: भारतीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में गंभीर लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने के आरोप में सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए।

आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं। मुर्शिदाबाद: सैफुर रहमान (समशेरगंज), नीतीश दास (फरक्का) और मुर्शिद आलम (सूती)। दक्षिण 24 परगना: सत्यजीत दास और जॉयदीप कुंडू (कैनिंग पुरबा)। जलपाईगुड़ी: डालिया राय चौधरी (मयनागुड़ी)। पश्चिम मेदिनीपुर: देबाशीष विश्वास (डेबरा)।

इन अधिकारियों पर वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग, डेटा सुरक्षा से समझौते और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन न करने का आरोप है। यह पहली बार नहीं है जब बंगाल में चुनावी अधिकारियों पर गाज गिरी है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी धांधली के आरोपों के बाद चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था।

हालाँकि, राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित तो कर दिया था, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग ने अब 17 फरवरी 2026 की समयसीमा तय की है, जिसके भीतर राज्य सरकार को इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने होंगे।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर बंगाल में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की इन कार्रवाइयों को पक्षपातपूर्ण और बाहरी दबाव करार दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया है कि वह मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा को बर्दाश्त नहीं करेगा। आयोग ने अब तक करीब 58 लाख फर्जी या संदिग्ध नाम मतदाता सूची से हटाए हैं, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग जारी है।