स्विट्जरलैंड में अजीब किस्म के जनमत संग्रह की तैयारी जारी
बर्नः स्विट्जरलैंड में आगामी 14 जून, 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जनमत संग्रह होने जा रहा है, जो देश की भविष्य की जनसांख्यिकीय और आर्थिक दिशा तय कर सकता है। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति, दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने प्रस्ताव रखा है कि स्विट्जरलैंड की स्थायी निवासी जनसंख्या को 10 मिलियन (1 करोड़) तक सीमित कर दिया जाए। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब देश में आप्रवासन और उसके संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर तीव्र बहस छिड़ी हुई है।
वर्तमान में स्विट्जरलैंड की जनसंख्या लगभग 9.1 मिलियन है। एसवीपी का यह प्रस्ताव, जिसे 10 मिलियन वाले स्विट्जरलैंड को सरकार के लिए एक द्वि-चरणीय कार्ययोजना निर्धारित करता है। जैसे ही देश की जनसंख्या 9.5 मिलियन तक पहुँचेगी, सरकार को नए प्रवासियों, शरण चाहने वालों और विदेशी निवासियों के परिवार के सदस्यों के प्रवेश पर रोक लगानी होगी।
यदि जनसंख्या 10 मिलियन की अंतिम सीमा को छूती है, तो सरकार को उन सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों को समाप्त करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जो जनसंख्या वृद्धि का कारण बनते हैं। इसमें विशेष रूप से यूरोपीय संघ के साथ मुक्त आवाजाही समझौता शामिल है।
एसवीपी का तर्क है कि स्विट्जरलैंड एक जनसंख्या विस्फोट का सामना कर रहा है। पार्टी के अनुसार, अनियंत्रित आप्रवासन के कारण सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है, बुनियादी ढांचा चरमरा रहा है और घरों के किराए में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। हाल ही में SVP ने एक विवादित विज्ञापन साझा किया जिसमें आर्थिक अभिजात वर्ग को आप्रवासन से लाभ उठाते हुए और आम स्विस जनता को पीड़ित दिखाया गया है।
भले ही स्विस फेडरल काउंसिल (सरकार) और अधिकांश अन्य राजनीतिक दल इस पहल का विरोध कर रहे हैं, लेकिन हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लगभग 48 प्रतिशत मतदाता इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं। स्विट्जरलैंड की प्रत्यक्ष लोकतंत्र प्रणाली के तहत, किसी भी प्रस्ताव पर राष्ट्रीय मतदान के लिए 18 महीनों के भीतर 100,000 हस्ताक्षरों की आवश्यकता होती है, जिसे एसवीपी ने आसानी से पूरा कर लिया है।
यदि 14 जून को स्विस जनता इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करती है, तो यह न केवल स्विट्जरलैंड के घरेलू कानूनों को बदल देगा, बल्कि यूरोपीय संघ के साथ उसके दशकों पुराने संबंधों को भी संकट में डाल देगा। यह जनमत संग्रह इस बुनियादी सवाल पर केंद्रित है कि क्या एक छोटा, समृद्ध देश अपनी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपनी विकास सीमा तय कर सकता है।