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भोपाल में अगले 2 महीने तक सख्त पहरा! अब बिना अनुमति नहीं निकाल सकेंगे रैली और जुलूस, आदेश उल्लंघन पर होगी जेल

भोपाल: भोपाल में अब धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली और आमसभा आयोजित करने से पहले पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने पर आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश अगले दो माह तक प्रभावी रहेगा।

अनुमति के बिना आयोजन पर होगी कार्रवाई

जारी आदेश के अनुसार किसी भी संगठन, राजनीतिक दल या समूह को धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली, पदयात्रा, वाहन रैली, पुतला दहन या शासकीय कार्यालय अथवा निवास के घेराव जैसे कार्यक्रम आयोजित करने से पहले पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) से अनुमति लेना आवश्यक होगा। बिना अनुमति आयोजित कार्यक्रम के दौरान यदि अव्यवस्था फैलती है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी आयोजकों की मानी जाएगी।

हथियार, विस्फोटक और मशाल जुलूस पर रोक

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रैली या कार्यक्रम में हथियार या विस्फोटक सामग्री लाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा मशाल जुलूस निकालने पर भी रोक लगाई गई है। साथ ही किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले भाषण या प्रकाशन पर भी सख्त प्रतिबंध रहेगा।

राजधानी में अक्सर होते हैं प्रदर्शन

भोपाल राजधानी होने के कारण यहां कर्मचारी संगठनों, छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा अक्सर विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं। सामान्य दिनों में शहर में औसतन प्रतिदिन 3 से 5 छोटे-बड़े धरना-प्रदर्शन होते हैं। इनमें ज्ञापन सौंपना, प्रतीकात्मक प्रदर्शन या धरना शामिल रहता है।

बड़े मुद्दों पर बढ़ जाती है संख्या

विधानसभा या लोकसभा चुनाव, भर्ती घोटालों या कर्मचारी आंदोलनों जैसे बड़े मुद्दों के दौरान विरोध प्रदर्शनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। ऐसे समय में एक ही दिन में 10 से 15 तक धरना-प्रदर्शन और रैलियां आयोजित होने लगती हैं।