Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mandla Crime: मंडला में रिश्तों का कत्ल! पिता के साथ मिलकर बेटे ने की मां की हत्या, रोंगटे खड़े कर दे... Ishaan Khatter Video: रेस्टोरेंट से बाहर निकलते ही गिराई कॉफी, सफेद पैंट हुई खराब तो पैपराजी के सामन... NSA Ajit Doval Riyadh Visit: अजीत डोभाल ने रियाद में सऊदी विदेश मंत्री और क्राउन प्रिंस के करीबियों ... Bank Holiday Today: अक्षय तृतीया के बाद आज भी बंद रहेंगे बैंक? जानें 20 अप्रैल को किन राज्यों में रह... Motorola Edge 70 Pro Launch: 22 अप्रैल को लॉन्च होगा मोटोरोला का नया फोन, 6500mAh बैटरी और 144Hz डिस... PBKS vs LSG: श्रेयस अय्यर ने छोड़े इतने कैच की टोपी से छिपाना पड़ा मुंह, शर्मिंदगी का VIDEO सोशल मीड... Chardham Yatra 2026: अक्षय तृतीया के शुभ योग में शुरू हुई चारधाम यात्रा; जानें केदारनाथ-बद्रीनाथ के ... Chatra News: चतरा में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से मां और दो बेटियों की मौत; चंद मिनट में उजड़ ... Police Action: SP की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हंसना ASI को पड़ा भारी, अनुशासनहीनता के आरोप में ... Postmaster Suicide: सट्टे के कर्ज में डूबे पोस्टमास्टर ने दोस्त के घर दी जान, लेनदारों के दबाव में ख...

सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ी 1.75 करोड़ की मशीन! 4 साल तक खाती रही धूल, अब कबाड़ के भाव बिका ‘करोड़ों का खजाना’

भोपाल: मध्यप्रदेश में जर्जर हो चुके सैकड़ों पुलों की तकनीकी जांच के लिए उपयोग की जाने वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) की इकलौती ब्रिज अंडर स्लंग इंस्पेक्शन यूनिट (MBIU) को नीलाम कर दिया गया है। करीब पौने दो करोड़ रुपए की लागत से खरीदी गई यह जर्मन मशीन बिना तोड़-फोड़ किए पुलों की तकनीकी जांच यानी नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) करने में सक्षम थी। विभाग ने इसे कबाड़ घोषित कर मुंबई की एक कंपनी को बेच दिया।

चार साल से खराब पड़ी थी मशीन

यह मशीन पिछले चार वर्षों से विभाग के ईएंडएम (इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल) विंग में निष्क्रिय पड़ी थी। इसके हाइड्रोलिक पुर्जे खराब हो गए थे और उन्हें ठीक कर पाना विभाग के लिए बड़ी समस्या बन गया था। लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण मशीन धूल खाती रही। करीब एक साल तक चली नीलामी प्रक्रिया और विभागीय अनुमतियों के बाद हाल ही में इसे कबाड़ घोषित कर बेच दिया गया। इसके बाद अब विभाग के पास पुलों की तकनीकी जांच के लिए कोई दूसरी मशीन नहीं बची है।

ट्रायल के तौर पर खरीदी गई थी मशीन

करीब 16 साल पहले भारत सरकार ने जर्मनी की कंपनी ‘मूग’ से ट्रायल के तौर पर यह मशीन 1.75 करोड़ रुपए में खरीदी थी। उस समय सरकार ने कुल तीन मशीनें खरीदी थीं, जिन्हें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को दिया गया था। मध्यप्रदेश में इस मशीन की मदद से 200 से अधिक पुलों का तकनीकी ऑडिट किया गया था। वर्ष 2018 में नर्मदापुरम के सुखतवा पुल की आखिरी बार जांच इसी मशीन से की गई थी। इसके बाद वर्ष 2022 से यह मशीन पूरी तरह बंद पड़ी थी।

राज्य में 253 पुल जर्जर घोषित

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में जर्जर पुलों की स्थिति चिंताजनक है और ऐसी मशीनों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 253 पुल जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इनमें से 46 पुल बेहद खतरनाक श्रेणी में रखे गए हैं। इन पुलों के सरिये तक जंग खा चुके हैं और कई जगहों पर केवल सीमेंट का लेप लगाकर अस्थायी मरम्मत की गई है।

15 मार्च 2026 तक मांगी गई डीपीआर

इसी स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने 15 मार्च 2026 तक सभी जर्जर सड़कों और पुलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।