पेरिस के लौवर म्यूजियम को दस मिलियन यूरो का नुकसान
पेरिसः पेरिस के विश्वप्रसिद्ध लौवर संग्रहालय में सक्रिय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोह के खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों और पर्यटन जगत को हैरत में डाल दिया है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कला संग्रहालय, लौवर को निशाना बनाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय जालसाज गिरोह का पेरिस पुलिस ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है।
पुलिस विभाग द्वारा पिछले कुछ घंटों में चलाए गए एक विशेष छापेमारी अभियान के दौरान 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह के तार कई देशों से जुड़े हुए हैं और यह एक सोचे-समझे नेटवर्क के तहत काम कर रहा था।
जांचकर्ताओं ने खुलासा किया है कि यह गिरोह तकनीक का सहारा लेकर सैलानियों को अपना शिकार बना रहा था। गिरोह ने डार्क वेब पर एक अवैध प्लेटफॉर्म विकसित किया था, जिसके माध्यम से वे फर्जी क्यूआर कोड वाले टिकट बेच रहे थे। ये टिकट दिखने में इतने असली थे कि पहली नज़र में सुरक्षाकर्मियों या डिजिटल स्कैनरों के लिए इन्हें पहचानना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
सैलानियों को ये टिकट आधिकारिक कीमतों से थोड़े कम दाम पर या फास्ट ट्रैक एंट्री के नाम पर बेचे जाते थे। चूंकि लौवर में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं, इसलिए गिरोह ने भीड़ का फायदा उठाकर इस गोरखधंधे को बड़े स्तर पर फैला रखा था।
संग्रहालय प्रशासन द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस धोखाधड़ी के कारण अब तक 10 मिलियन यूरो (लगभग 90 करोड़ रुपये से अधिक) का बड़ा वित्तीय नुकसान हो चुका है। यह नुकसान न केवल राजस्व की हानि है, बल्कि इसने दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
इस घटना के बाद लौवर प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से अपनी डिजिटल चेकिंग प्रोसेस और सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए टिकटों पर मौजूद क्यूआर कोड को अब और अधिक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड बनाया जाएगा।
डिजिटल स्कैनिंग के साथ-साथ रैंडम फिजिकल चेकिंग को भी अनिवार्य किया जा रहा है। पेरिस पुलिस और संग्रहालय प्रशासन ने संयुक्त रूप से पर्यटकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। सैलानियों को सलाह दी गई है कि वे केवल और केवल आधिकारिक वेबसाइट या प्रमाणित काउंटरों से ही टिकट खरीदें।
किसी भी तीसरे पक्ष या लुभावने विज्ञापनों के झांसे में न आएं। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल युग में कला और संस्कृति के केंद्र भी साइबर अपराधियों से अछूते नहीं हैं। वर्तमान में गिरफ्तार किए गए 9 आरोपितों से पूछताछ जारी है ताकि इस गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुँचा जा सके।