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मस्तिष्क के रहस्यमयी चौकीदार की पहचान हुई

चिकित्सा जगत की नई खोज ने विज्ञान जगत को चौंकाया

  • नई बेस बैरियर सेल्स की पहचान हुई

  • क्या है इन कोशिकाओं की खासियत

  • बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद

राष्ट्रीय खबर

रांचीः मानव मस्तिष्क ब्रह्मांड की सबसे जटिल संरचनाओं में से एक है। इसकी सुरक्षा के लिए प्रकृति ने ब्लड-ब्रेन बैरियर जैसी एक रक्षा प्रणाली बनाई है, जो रक्त के हानिकारक तत्वों को दिमाग में घुसने से रोकती है। हाल ही में न्यूरोवैज्ञानिकों ने इस रक्षा प्रणाली के भीतर एक नई प्रकार की कोशिका की खोज की है, जिसे बेस बैरियर सेल का नाम दिया गया है। ये कोशिकाएं मस्तिष्क के सबसे निचले और संवेदनशील हिस्सों में एक स्मार्ट गेटकीपर या चौकीदार की तरह काम करती हैं।

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अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि मस्तिष्क की सुरक्षा दीवार काफी हद तक एक जैसी होती है, लेकिन इस खोज ने साबित किया है कि मस्तिष्क के आधार पर स्थित ये कोशिकाएं विशेष रूप से अधिक सतर्क और सक्रिय होती हैं। ये कोशिकाएं केवल एक भौतिक दीवार नहीं हैं, बल्कि एक इंटेलिजेंट सेंसर की तरह काम करती हैं।

ये पहचान सकती हैं कि रक्त में बहने वाला कौन सा कण पोषण है और कौन सा खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि चिकित्सा विज्ञान अब भी दिमाग को पूरी तरह समझ ही नहीं पाया है। जिस कारण कई बार मरीज का ईलाज कैसे हो, इस सवाल का उत्तर खुद चिकित्सक भी तय नहीं कर पाते थे।

यह खोज चिकित्सा विज्ञान के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अल्जाइमर, पार्किंसंस और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी बीमारियां अक्सर तब होती हैं जब मस्तिष्क की सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है और हानिकारक तत्व न्यूरॉन्स को नष्ट करने लगते हैं। बेस बैरियर सेल्स को सक्रिय करके मस्तिष्क से जहरीले प्रोटीन (जैसे अमाइलॉइड बीटा) को बाहर निकालने के नए तरीके विकसित किए जा सकते हैं।

दिमाग में होने वाली सूजन को नियंत्रित करने में ये कोशिकाएं मुख्य भूमिका निभाती हैं। अक्सर दवाएं मस्तिष्क की कठोर सुरक्षा दीवार को पार नहीं कर पातीं। इन कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को समझकर, वैज्ञानिक ऐसी दवाएं बना सकेंगे जो सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुँच सकें। यह खोज न केवल हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने का नजरिया बदल देगी, बल्कि आने वाले दशक में दिमागी रोगों के इलाज की दिशा को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

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