थाईलैंड के डे केयर सेंटर में पूर्व पुलिस की अचानक हमला
बैंकॉक: दक्षिण-पूर्व एशिया के शांत देशों में शुमार थाईलैंड आज एक ऐसी वीभत्स घटना से दहल उठा है, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए। देश के पूर्वोत्तर प्रांत नोंग बुआ लम्फू के एक डे-केयर सेंटर में हुई अंधाधुंध गोलीबारी और चाकूबाजी में 22 मासूम बच्चों सहित कम से कम 34 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई है।
यह हमला आधुनिक थाई इतिहास के सबसे घातक और दुखद सामूहिक हत्याकांडों में से एक बन गया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह जघन्य अपराध दोपहर के समय हुआ। उस वक्त डे-केयर सेंटर के भीतर छोटे बच्चे अपनी दोपहर की नींद सो रहे थे। हमलावर, जो एक पूर्व पुलिस अधिकारी बताया जा रहा है, अचानक परिसर में दाखिल हुआ।
उसने सबसे पहले बाहर मौजूद स्टाफ के सदस्यों पर गोलियां चलाईं और फिर सीधे उस कमरे की ओर बढ़ा जहाँ बच्चे सो रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वहाँ मौजूद शिक्षकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाने का साहसी प्रयास किया, लेकिन हथियारबंद हमलावर की क्रूरता के आगे उनकी कोशिशें विफल रहीं।
घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गया। स्थानीय पुलिस ने जब तक उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी की, तब तक उसने अपने घर पहुँचकर एक और भयानक कृत्य को अंजाम दिया। उसने अपनी पत्नी और स्वयं के बच्चे की हत्या करने के बाद खुद को भी गोली मार ली। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावर को हाल ही में उसके पद से बर्खास्त किया गया था, जिसे इस हमले के संभावित कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने इस घटना को एक राष्ट्रीय त्रासदी घोषित किया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से पूरे देश में सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए न केवल वित्तीय मुआवजे की घोषणा की है, बल्कि जीवित बचे बच्चों और शोकाकुल माता-पिता के लिए दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था भी की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र और विश्व के तमाम नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। विश्व समुदाय ने थाईलैंड के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए बच्चों के खिलाफ होने वाली ऐसी हिंसा को मानवता पर कलंक बताया है। फिलहाल, पूरे प्रांत में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग उन मासूमों की याद में मोमबत्तियां जलाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।