Jayant Singh Murder Case: जयंत सिंह हत्याकांड के आरोपी पर बड़ी कार्रवाई; अवैध ठिकाने पर चला बुलडोजर, अपराधियों को देता था पनाह
बोकारो: जयंत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी और जेल में बंद विनोद कुमार (उर्फ विनोद खोपड़ी) के सेक्टर-6 स्थित अवैध निर्माण को बोकारो स्टील लिमिटेड (बीएसएल) के संपदा न्यायालय के आदेश पर आज बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया. इस कार्रवाई के दौरान बीएसएल के टाउन एंड एडमिनिस्ट्रेशन (टीए) विभाग के जीएम, डीएसपी और मजिस्ट्रेट मौजूद रहे.
बोकारो स्टील प्लांट की जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
सिटी डीएसपी आलोक रंजन ने मौके पर बताया कि विनोद कुमार एक आपराधिक तत्व है, जिसके खिलाफ 20 से अधिक मामले दर्ज हैं और वह वर्तमान में जेल में बंद है. उन्होंने कहा कि सेक्टर-6 में विनोद कुमार द्वारा अवैध रूप से बनाया गया निर्माण एक पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल होता था, जहां उनके संरक्षण में रहने वाले लोग ठहरते थे. आज न्यायालय के आदेश पर इस जगह को ध्वस्त किया जा रहा है. यह एक स्पष्ट संदेश है कि जो भी गलत काम करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
बीएसएल के जनरल मैनेजर ने दी जानकारी
नगर सेवा भवन के जनरल मैनेजर एके सिंह ने बताया कि इस जमीन पर बने अवैध निर्माण को लेकर बार-बार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं. उसी के आधार पर बोकारो स्टील ने केस दायर किया और उचित प्रक्रिया के तहत इसे हटाने का आदेश प्राप्त हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बोकारो स्टील की जमीन है. बीएसएल की जमीन पर कोई भी अवैध निर्माण होता है, तो एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे हटाया जाता है. विनोद कुमार का यहां अवैध कब्जा था. इस कब्जे को लेकर संपदा न्यायालय में मामला चल रहा था और आज इसे तोड़ने का कार्य किया जा रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि जहां भी सेल (बीएसएल) की जमीन पर अतिक्रमण होगा, उसे हटाने का काम नगर सेवा विभाग करेगा. यह एक रूटीन प्रक्रिया है और बीएसएल अपनी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित रूप से कार्रवाई करता है.
विनोद कुमार के समर्थकों का विरोध और प्रतिक्रिया
विनोद कुमार के समर्थकों का कहना है कि यह स्थान एक ऑफिस था, जहां गरीब और दबे-कुचले लोगों की आवाज उठाई जाती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव चल रहे हैं और विनोद कुमार चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए जनता की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है. बोकारो की जनता सब देख रही है. समर्थकों ने बीएसएल से 5 दिनों की मोहलत मांगी थी, लेकिन नहीं मिलने पर उन्होंने कहा कि वे न्यायालय का सम्मान करते हैं और चल रही कार्रवाई का कोई विरोध नहीं करेंगे.