लीबिया के समुद्री तट पर फिर से बड़ा हादसा
त्रिपोली: बीती शाम भूमध्य सागर के इतिहास में एक और काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की रिपोर्ट के अनुसार, लीबियाई तट के समीप एक जर्जर रबर की नाव डूबने से 53 प्रवासियों की जलसमाधि हो गई। इस हृदयविदारक हादसे में दो मासूम शिशुओं ने भी अपनी जान गंवा दी, जो बेहतर भविष्य के सपने लिए इस खतरनाक यात्रा पर निकले थे। हादसे का शिकार हुई नाव पर क्षमता से अधिक यानी 55 लोग सवार थे। शुरुआती जांच के मुताबिक, समुद्र की उग्र लहरों और नाव की कमजोर बनावट के कारण बीच समुद्र में नाव का संतुलन बिगड़ गया।
स्थानीय तटरक्षकों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए केवल दो लोगों को जीवित बचाया है। अभी भी दर्जनों लोग लापता हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ठंडे पानी और समय के बीतने के साथ अब किसी के जीवित बचने की संभावना क्षीण हो गई है। लीबिया पिछले एक दशक से प्रवासियों के लिए एग्जिट पॉइंट बना हुआ है। गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर मानव तस्करों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। ये गिरोह गरीब और युद्धग्रस्त देशों के लोगों को सुरक्षित भविष्य का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूलते हैं और फिर उन्हें समुद्र की लहरों के हवाले कर देते हैं।
संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए यूरोपीय संघ की नीतियों की आलोचना की है। सुरक्षित रास्तों का अभाव: कानूनी और सुरक्षित प्रवासन रास्तों की कमी के कारण लोग इन मौत की नावों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
यूरोपीय देशों के बीच प्रवासियों के वितरण और बचाव अभियानों की फंडिंग को लेकर चल रहे विवाद ने समुद्र में निगरानी तंत्र को कमजोर कर दिया है। आईओएम का कहना है कि यदि सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन अधिक सक्रिय होते, तो इन मौतों को टाला जा सकता था। जनवरी 2026 से अब तक भूमध्य सागर में मरने वालों का आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 15% अधिक है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सर्च एंड रेस्क्यू मिशन और तस्करी विरोधी कानूनों को सख्त नहीं किया, तो 2026 प्रवासियों के लिए सबसे घातक वर्ष साबित हो सकता है।
यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वैश्विक प्रवासन नीति की विफलता का परिणाम है। जब तक गरीबी, युद्ध और तस्करी के मूल कारणों पर प्रहार नहीं होगा, भूमध्य सागर की लहरें मासूमों को निगलती रहेंगी।