ए आई का उपयोग सीखने का विकल्प नहीं बनना चाहिए
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः मोबाइल के हानिकारक प्रभावों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को छात्रों को सलाह दी कि वे तकनीक को अपना गुलाम न बनने दें। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मार्गदर्शन और मूल्यवर्धन के लिए किया जाना चाहिए, न कि सीखने के विकल्प के रूप में।
अपने वार्षिक कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड में प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन कुछ बच्चों के मालिक बन गए हैं, जो बिना फोन या टीवी स्क्रीन के खाना तक नहीं खा पाते। कोयंबटूर, रायपुर, गुवाहाटी और गुजरात के छात्रों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, हर युग ने नई तकनीक को लेकर चिंताओं का सामना किया है, चाहे वह कंप्यूटर हो या मोबाइल। लेकिन डर अनावश्यक है। तकनीक को मानव जीवन का स्वामी नहीं बनना चाहिए। आपको दृढ़ संकल्प करना होगा कि आप तकनीक को अपना गुलाम नहीं बनने देंगे।
प्रधानमंत्री ने उभरती हुई प्रौद्योगिकियों से न डरने, बल्कि अपनी क्षमताओं को निखारने के लिए उनका उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नौकरियों की प्रकृति हमेशा बदलती रहती है, जैसे परिवहन बैलगाड़ी से हवाई जहाज तक पहुँच गया, लेकिन जीवन चलता रहता है। उन्होंने छात्रों को पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए भरपूर नींद लेने की भी सलाह दी। साथ ही, माता-पिता से अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करने का आग्रह किया।
भविष्य के नेताओं के गुणों पर पूछे गए सवाल पर पीएम ने कहा कि पहला गुण निडर होना है। नेतृत्व तब शुरू होता है जब कोई दूसरों का इंतजार किए बिना खुद पहल करता है। उन्होंने कचरा उठाने का उदाहरण देते हुए कहा कि नेतृत्व केवल चुनाव या भाषण नहीं, बल्कि दूसरों को अपनी बात समझाने और सहमत करने की क्षमता है।
स्टार्टअप्स के विषय पर उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को अपनी पसंद के क्षेत्र में छोटी टीमें बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं के छात्रों को विकसित भारत 2047 के सपने को संजोते देख उन्हें खुशी होती है। उन्होंने अनुशासन के महत्व पर जोर देते हुए विकसित देशों की अच्छी आदतों, जैसे रेड लाइट पर इंजन बंद करना और भोजन बर्बाद न करना, को अपनाने की सीख दी। 2018 में शुरू हुए परीक्षा पे चर्चा ने इस साल 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरणों के साथ नया रिकॉर्ड बनाया है।