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परमाणु संवर्धन के दबाव पर भी ईरान का अड़ियल रुख

ईरान की तकनीकी घोषणा से वार्ता में नया मोड़

वियनाः ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है, जहाँ ईरान और दुनिया की महाशक्तियों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। इसी गहमागहमी के बीच, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने अगले कुछ घंटों में एक महत्वपूर्ण तकनीकी घोषणा करने का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा ईरान के परमाणु कार्यक्रम की दिशा और 2015 के परमाणु समझौते के भविष्य को निर्धारित करेगी।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में ईरान के फोर्डो और नतांज़ संयंत्रों में हो रही गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई थी। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अब अत्यधिक उन्नत सेंट्रीफ्यूज का उपयोग करके यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को तेज करने की योजना बना रहा है। तेहरान का तर्क है कि यह कदम विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे 60 प्रतिशत संवर्धन (हथियार-ग्रेड के करीब) की ओर बढ़ते कदम के रूप में देख रहा है।

वॉशिंगटन में ट्रंप प्रशासन की वापसी ने ईरान को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे ईरान पर पहले से भी अधिक कड़े प्रतिबंध लगाने और अधिकतम दबाव की नीति को नए सिरे से लागू करने के पक्ष में हैं। ऐसे में, ईरान की यह संभावित तकनीकी घोषणा परमाणु वार्ता की मेज पर अपनी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने का एक तरीका मानी जा रही है। ईरान यह संदेश देना चाहता है कि दबाव के आगे झुकने के बजाय वह अपने तकनीकी विकास की गति को बढ़ा सकता है।

ईरान की इस संभावित घोषणा ने न केवल पश्चिमी देशों, बल्कि खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई आदि) के बीच भी बेचैनी पैदा कर दी है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान संवर्धन के स्तर को बढ़ाता है, तो इससे मध्य-पूर्व में एक खतरनाक हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है। इजरायल पहले ही चेतावनी दे चुका है कि वह ईरान को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बनने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, जो इस क्षेत्र को एक नए युद्ध की ओर धकेल सकता है।

वियना में चल रही वार्ता अब एक नाजुक मोड़ पर है। आगामी कुछ घंटे यह तय करेंगे कि क्या ईरान कूटनीतिक रास्ते पर लौटकर प्रतिबंधों से राहत चाहता है, या वह अपनी परमाणु क्षमताओं को उस बिंदु तक ले जाएगा जहाँ से वापसी असंभव होगी। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें तेहरान से आने वाली उस तकनीकी घोषणा पर टिकी हैं, जो वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को बदल सकती है।