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ईडी के बाद अब चुनाव आयोग ने भी डराने की शिकायत की

ईसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के निर्वाचन आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण जवाबी हलफनामा दायर कर पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान हो रही हिंसा, डराने-धमकाने और अधिकारियों के काम में बाधा डालने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग का यह रुख राज्य की चुनावी शुचिता और प्रशासनिक सहयोग की कमी को उजागर करता है।

निर्वाचन आयोग ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में लगे अधिकारियों को भारी अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है। हलफनामे के अनुसार, पश्चिम बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को इस तरह की धमकियां मिल रही हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।

ईसीआई का दावा है कि राज्य मशीनरी बूथ स्तर के अधिकारियों की शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज करने या उन्हें सुरक्षा देने में अनिच्छा दिखा रही है। आयोग ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भय फैलाने वाले और भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया है। ईसीआई के अनुसार, इन भाषणों ने ऐसा डरावना माहौल बना दिया है कि कई अधिकारियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर अपनी ड्यूटी से हटने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले आई पैक के यहां छापामारी करने गयी ईडी के टीम भी ऐसी शिकायत सुप्रीम कोर्ट में कर चुकी है। आयोग ने 14 जनवरी 2026 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के बारे में भ्रामक जानकारी फैलाई और चुनावी अधिकारियों को खुलेआम निशाना बनाया। एक अन्य घटना में, मुख्यमंत्री द्वारा एक माइक्रो-ऑब्जर्वर का नाम लेकर सार्वजनिक संबोधन करने को आयोग ने अधिकारियों पर अनुचित दबाव करार दिया है।

इसके अलावा, राज्य के एक मंत्री द्वारा चुनाव आयोग के अधिकारियों की टांगें तोड़ने और एक विधायक द्वारा नाम हटाने की प्रक्रिया को आग से खेलने जैसा बताने वाले बयानों को भी रिकॉर्ड पर लाया गया है। हलफनामे में 24 नवंबर 2025 की एक घटना का उल्लेख है, जहाँ एक उग्र भीड़ ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का घेराव किया, तोड़फोड़ की और अधिकारियों को बाहर से ताला लगाकर बंधक बना लिया। आयोग का कहना है कि इस घटना में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पश्चिम बंगाल के सीईओ देश के एकमात्र ऐसे चुनावी अधिकारी हैं जिन्हें गृह मंत्रालय द्वारा वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।

आयोग ने बताया कि मतदाता सूची के मसौदे में लगभग 58 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं जो या तो मृत हैं, अनुपस्थित हैं या स्थानांतरित हो चुके हैं। इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए 1.51 करोड़ नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसमें राज्य सरकार का सहयोग अनिवार्य है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा की जाएगी। यह कानूनी लड़ाई पश्चिम बंगाल की भावी चुनावी दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगी।