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जनसुराज की चुनावी याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

जनता ने आपको नकारा है : अदालत

  • सुप्रीम कोर्ट की बहुत कड़ी टिप्पणी

  • पहले तो हाईकोर्ट में जाना चाहिए था

  • यह सिर्फ प्रचार पाने का एक तरीका है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली पार्टी जन सुराज की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनावों के परिणामों को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए तीखी टिप्पणी की।

सुनवाई के दौरान पीठ ने जन सुराज की चुनावी हार पर कटाक्ष करते हुए कहा, जनता ने आपको नकार दिया और अब आप प्रचार पाने के लिए इस न्यायिक मंच का उपयोग कर रहे हैं? न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसे दावों को सीधे शीर्ष अदालत में कैसे उठाया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अनुच्छेद 32 के बजाय पहले पटना हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए था।

जन सुराज ने चुनाव परिणामों को शून्य घोषित करने की मांग की थी। याचिका में सत्ताधारी जदयू-भाजपा गठबंधन पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के व्यापक उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप लगाया गया कि चुनाव के दौरान प्रति परिवार एक महिला को 10,000 रुपये वितरित किए गए, जिससे लगभग 25-35 लाख महिला मतदाता प्रभावित हुईं।

प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि जदयू ने प्रति निर्वाचन क्षेत्र करोड़ों रुपये बांटे, जबकि सामान्य परिस्थितियों में वे 25 से अधिक सीटें नहीं जीत पाते। विपरीत परिस्थितियों और किशोर की भविष्यवाणियों के बावजूद, नीतीश कुमार की जदयू 85 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। सुप्रीम कोर्ट ने उल्लेख किया कि चुनावी मुफ्त उपहारों का व्यापक मुद्दा पहले से ही एक अलग मामले में विचाराधीन है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि वित्तीय लाभों के ऐसे वादे राज्यों को वित्तीय संकट में डाल सकते हैं। अंत में, पीठ ने कहा कि वह इस गंभीर मुद्दे की जांच सार्वजनिक हित से प्रेरित व्यक्तियों की याचिकाओं पर करना पसंद करेगी, न कि उन राजनीतिक दलों की जो चुनाव में पूरी तरह परास्त हो चुके हैं।