Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...

जनसुराज की चुनावी याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

जनता ने आपको नकारा है : अदालत

  • सुप्रीम कोर्ट की बहुत कड़ी टिप्पणी

  • पहले तो हाईकोर्ट में जाना चाहिए था

  • यह सिर्फ प्रचार पाने का एक तरीका है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली पार्टी जन सुराज की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनावों के परिणामों को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए तीखी टिप्पणी की।

सुनवाई के दौरान पीठ ने जन सुराज की चुनावी हार पर कटाक्ष करते हुए कहा, जनता ने आपको नकार दिया और अब आप प्रचार पाने के लिए इस न्यायिक मंच का उपयोग कर रहे हैं? न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसे दावों को सीधे शीर्ष अदालत में कैसे उठाया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अनुच्छेद 32 के बजाय पहले पटना हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए था।

जन सुराज ने चुनाव परिणामों को शून्य घोषित करने की मांग की थी। याचिका में सत्ताधारी जदयू-भाजपा गठबंधन पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के व्यापक उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप लगाया गया कि चुनाव के दौरान प्रति परिवार एक महिला को 10,000 रुपये वितरित किए गए, जिससे लगभग 25-35 लाख महिला मतदाता प्रभावित हुईं।

प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि जदयू ने प्रति निर्वाचन क्षेत्र करोड़ों रुपये बांटे, जबकि सामान्य परिस्थितियों में वे 25 से अधिक सीटें नहीं जीत पाते। विपरीत परिस्थितियों और किशोर की भविष्यवाणियों के बावजूद, नीतीश कुमार की जदयू 85 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। सुप्रीम कोर्ट ने उल्लेख किया कि चुनावी मुफ्त उपहारों का व्यापक मुद्दा पहले से ही एक अलग मामले में विचाराधीन है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि वित्तीय लाभों के ऐसे वादे राज्यों को वित्तीय संकट में डाल सकते हैं। अंत में, पीठ ने कहा कि वह इस गंभीर मुद्दे की जांच सार्वजनिक हित से प्रेरित व्यक्तियों की याचिकाओं पर करना पसंद करेगी, न कि उन राजनीतिक दलों की जो चुनाव में पूरी तरह परास्त हो चुके हैं।