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राजनीति और पत्रकारिता एक दूसरे के पूरकः दीपिका पांडेय

मुनाफा और टीआरपी के बीच मर रही है असली पत्रकारिताः रासबिहारी

  • पत्रकारिता का सम्मान वाकई कम हुआ है

  • अब सच से भी सत्ता परहेज करने लगी है

  • पत्रकारों के राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने की मांग

राष्ट्रीय खबर

रांचीः राजनीति और पत्रकारिता एक दूसरे के पूरक हैं। जब पूरे समाज का मूल्यबोध कम हुआ है तो स्वाभाविक तौर पर इससे जुड़े हर विधा की सम्मान भी कम हुआ है। समाज में पहले भी अच्छे और बुरे लोग थे। लिहाजा यह हमारी खुद की जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने आस पास की स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें।

यह विचार राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह ने व्यक्त किये। वह रांची प्रेस क्लब में आयोजित एक सेमीनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थी।  झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन सह कार्यशाला आज रांची प्रेस क्लब परिसर में आयोजित किया गया।

उन्होंने कहा कि फर्जी पत्रकारिता से राज्य और राष्ट्र को नुकसान एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और राजनीति से जुड़े लोग अक्सर ही इसका खामियजा भुगत रहे हैं। उन्होंने इस क्रम में अपने नेता राहुल गांधी के खिलाफ हुए कुप्रचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब मुख्य धारा की मीडिया में सही बातें नहीं आती तो नागरिक स्वाभाविक तौर पर वैकल्पिक मीडिया की तरफ देखता है। इसलिए यह हरेक की जिम्मेदारी बनती है कि गलत चीजों को खुद से अलग करना होगा। उन्होंने  इस संबोधन के पूर्व समारोह की दीप जलाकर विधिवत शुरुआत की।

इस मौके पर नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष रासबिहारी ने कहा कि आज के दौर में मुनाफा और टीआरपी की होड़ में पत्रकारिता मर रही है। मीडिया घरानों में भी बहुत बुरी स्थिति है और सबसे अधिक परेशानी इस बात से है कि अब संपादक भी पत्रकारिता के विरोधी बनकर प्रबंधन के लिए मैनेजर का काम कर रहे हैं। उन्होंन राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों के लिए एक नेशनल रजिस्टर बनाने के अभियान को झारखंड में प्रारंभ करने की बात कही। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए पूरे देश में एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।

एनयूजे के महासचिव प्रदीप तिवारी ने मुख्य अतिथि को पत्रकार सुरक्षा कानून, पत्रकार पेंशन योजना और स्वास्थ्य सुविधाएं की मांगों से अवगत कराया। जिस पर मंत्री ने कहा  कि यूनियन की तरफ से विधिवत प्रस्ताव आने पर वह इन्हें सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेंगी।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार और प्रोफसर प्रकाश सहाय ने कहा कि मीडिया घरानो की सोच बदल गयी है। पहले जिसे छिपाया जाता था, उसे पत्रकार खोजकर जनता के बीच पेश करते थे। अब हालत यह है कि जो औपचारिक तौर पर बताया जाता है, वही खबर बनती है भले ही वह झूठ क्यों ना हो।

उन्होंने अपने चार दशक से अधिक के पत्रकारिता के अनुभव के आधार पर पत्रकारिता जगत में जिस तरीके से बदलाव हुए हैं, उनकी चर्चा की और फर्जी पत्रकारिता से होने वाले नुकसान को बारे में भी आगाह किया। कार्यक्रम में रांची के अलावा, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लातेहार, पलामू, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, सिंहभूम, धनबाद, गोमिया, पेटरवार, गोला, पतरातू, कुड़ू और अन्य अंचलों से आये पत्रकारों ने भाग लिया।