क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता का भी सार्वजनिक समर्थन
उत्तर पूर्व संवाददाता
गुवाहाटीः मणिपुर की राजधानी इंफाल में शनिवार को हजारों लोगों ने एक विशाल रैली निकालकर यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। मणिपुर बचाओ नाम की इस रैली का आयोजन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी द्वारा किया गया था, जो कई मैतेई नागरिक समाज संगठनों का एक प्रमुख समूह है।
पूर्वोत्तर के इस राज्य में चल रहे जातीय संघर्ष के बाद से कुकी समुदाय अपने सदस्यों के लिए एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहा है। गौरतलब है कि मई 2023 से इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी-ज़ो समूहों के बीच जारी हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। पिछले साल फरवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है।
शनिवार को आयोजित इस रैली के दौरान प्रदर्शनकारी टिड्डिम ग्राउंड से थाऊ ग्राउंड तक करीब 5 किलोमीटर पैदल चले। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं और वे जमकर नारेबाजी कर रहे थे। उनके पोस्टरों पर मणिपुर की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता से कोई समझौता नहीं, मणिपुर को बांटने की कोई कोशिश न की जाए और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को उनके घरों में वापस बसाया जाए जैसे नारे लिखे थे।
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें केवल मैतेई समुदाय ही नहीं, बल्कि गैर-मणिपुरी, मुस्लिम और नागा समुदायों के लोग भी शामिल हुए। रैली में शामिल बिद्यालक्ष्मी ओइनम ने कहा, हम इस रैली में अपनी इस बात को दोहराने आए हैं कि मणिपुर की अखंडता किसी भी कीमत पर नहीं टूटनी चाहिए। हम इस मामले में झुकेंगे नहीं।
एक अन्य प्रदर्शनकारी, खगेम्बम सुरजीत ने तीखे स्वर में कहा, मणिपुर की यह भूमि हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई है, म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों द्वारा नहीं। उल्लेखनीय है कि कुकी समुदाय के म्यांमार के चिन समुदाय के साथ जातीय संबंध हैं। इस विशाल रैली को देखते हुए पूरे इंफाल और राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी गई थी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।