भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान में और कठोरता दिखी
बीजिंगः चीन की एक शीर्ष पीपुल्स कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय दुनिया के सबसे घातक टेलीकॉम स्कैम नेटवर्क के 11 मुख्य अपराधियों को मौत की सजा दी है। यह फैसला केवल एक न्यायिक आदेश नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध सिंडिकेट्स के लिए एक गंभीर चेतावनी है। ये अपराधी म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेष रूप से लाउकाई और केके पार्क जैसे कुख्यात केंद्रों से अपना साम्राज्य चला रहे थे। इस सिंडिकेट ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करके एक ऐसा जाल बुना था जिसने न केवल चीन, बल्कि अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लाखों निर्दोष लोगों की जीवन भर की जमा पूंजी को लूट लिया था।
सजा पाने वाले अपराधियों पर मुख्य रूप से पिग बुचरिंग नामक घोटाले को संचालित करने का आरोप था। यह एक परिष्कृत साइबर अपराध है जहाँ अपराधी महीनों तक सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़ितों के साथ विश्वास और प्रेम का रिश्ता बनाते हैं फिर उन्हें फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए अपनी पूरी संपत्ति लगाने के लिए उकसाते हैं, जिसके बाद वे अचानक गायब हो जाते। जांच में पता चला कि इस गिरोह ने 2024-25 के बीच ही अरबों डॉलर की अवैध कमाई की थी और इस पैसे को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठिकाने लगाया गया था।
इस मामले का सबसे डरावना पहलू केवल वित्तीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपा मानव तस्करी का नेटवर्क था। अदालत में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, ये 11 अपराधी हजारों युवाओं को अच्छी नौकरी का झांसा देकर म्यांमार ले गए, जहाँ उन्हें बंधक बना लिया गया। उन्हें बिजली के झटके दिए जाते थे और पीटा जाता था यदि वे प्रतिदिन ठगी का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते थे। चीनी सुरक्षा एजेंसियों ने म्यांमार की जुंटा सेना और थाईलैंड पुलिस के साथ मिलकर ऑपरेशन क्लीन स्लेट 2025 चलाया, जिसके परिणामस्वरूप इन सरगनाओं को पकड़कर चीन लाया गया।
इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है। एम्नेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने मौत की सजा की तीव्रता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह दंड क्रूर और अमानवीय है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब अपराध का स्तर मानवता के खिलाफ हो और लाखों परिवारों को तबाह कर दे, तो न्याय भी उतना ही कठोर होना चाहिए। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबोपर जनता ने इस फैसले का जबरदस्त समर्थन किया है, क्योंकि चीन के भीतर शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जो इन स्कैम कॉल्स से प्रभावित न हुआ हो।
यह कार्रवाई दर्शाती है कि बीजिंग अब अपनी सीमाओं के बाहर संचालित होने वाले चीनी अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। चीन ने अब दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ एक नए साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल 2026 पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत डेटा का आदान-प्रदान और अपराधियों का तत्काल प्रत्यर्पण अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 11 प्रमुखों को फांसी दिए जाने के बाद, कंबोडिया, लाओस और म्यांमार में छिपे अन्य स्कैम गिरोहों में भगदड़ मच सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक संकेत है।