Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Goraya-Phillaur Highway Accident: जालंधर-लुधियाना हाईवे पर ट्राले और बाइक की भीषण टक्कर; लुधियाना के... Jalandhar Powercom Action: जालंधर में बिजली बोर्ड का बड़ा एक्शन, नगर निगम की अवैध स्ट्रीट लाइटों के ... Punjab ED Action: मंत्री संजीव अरोड़ा के बाद अब पावरकॉम चेयरमैन पर शिकंजा; ईडी की पूछताछ टली, अब 20 ... Punjab Weather Update: पंजाब में 18 से 23 मई तक भीषण लू का अलर्ट; बठिंडा में पारा 43 डिग्री पार, जान... Ludhiana Cyber Fraud: दिन में बेचता था सब्जी, रात को बनता था इंटरनेशनल साइबर ठग; लुधियाना में मुनीश ... PSPCL Smart Phone Controversy: पावरकॉम में महंगे स्मार्ट फोन बांटने पर बवाल; बिजली कर्मचारियों ने लग... Ludhiana Crime News: लुधियाना में घिनौना जालसाजी; मृत पत्नी को जिंदा बताकर बैंक से लिया 12.81 लाख का... Yamunanagar Kidnapping Attempt: यमुनानगर में 10 साल के बच्चे के अपहरण का प्रयास, बाइक से गिरा मासूम ... Gurugram Crime News: गुड़गांव में जनगणना ड्यूटी में लापरवाही पर बड़ा एक्शन, 10 सरकारी कर्मचारियों के... Faridabad EV Fire: फरीदाबाद में चलती इलेक्ट्रिक स्कूटी बनी आग का गोला, धुआं निकलते ही चालक ने कूदकर ...

कट्टरपंथियों के पीछे खड़ा है अमेरिकी प्रशासन

अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के आरोप में दम है

ढाका: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर जाने के करीब डेढ़ साल बाद हो रहे इन चुनावों में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। द वाशिंगटन पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अब बांग्लादेश की सबसे बड़ी कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि शेख हसीना की सरकार के दौरान इस पार्टी पर कई बार प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन 2024 के छात्र आंदोलन के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, ढाका स्थित एक अमेरिकी राजनयिक ने महिला पत्रकारों के साथ एक बंद कमरे में हुई बैठक में कहा कि बांग्लादेश का राजनीतिक झुकाव अब इस्लामी हो गया है। प्राप्त ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने भविष्यवाणी की है कि 12 फरवरी के चुनावों में जमात-ए-इस्लामी अब तक का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगी। राजनयिक ने यहाँ तक कहा, हम चाहते हैं कि वे हमारे मित्र बनें।

इतना ही नहीं, अमेरिका ने इस चिंता को भी खारिज कर दिया कि जमात सत्ता में आने पर सख्त शरीयत कानून लागू करेगी। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि यदि ऐसा कुछ होता है, तो अमेरिका तुरंत व्यापारिक टैरिफ लगाकर दबाव बना सकता है। हालांकि, अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता मोनिका शी ने इस बातचीत को एक नियमित और ऑफ-द-रिकॉर्ड चर्चा बताया है, जिसमें किसी एक पार्टी का पक्ष लेने की बात से इनकार किया गया है।

जमात-ए-इस्लामी की स्थापना 1941 में सैयद अबुल आला मौदुदी ने की थी। इस पार्टी का इतिहास काफी विवादित रहा है, विशेषकर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान जब इसने पाकिस्तान का साथ दिया था। शेख हसीना ने 2009 में सत्ता में वापसी के बाद युद्ध अपराधों के लिए जमात के कई शीर्ष नेताओं को फांसी की सजा दिलवाई थी। लेकिन वर्तमान में शफीकुर रहमान के नेतृत्व में पार्टी ने अपनी छवि को उदार दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने भ्रष्टाचार को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है और पहली बार कृष्ण नंदी जैसे अल्पसंख्यक उम्मीदवार को भी मैदान में उतारा है।

वैसे अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहले ही यह कहा था कि उनपर सेंट मार्टिन द्वीप अमेरिका को सौंप देने का दबाव था। अगर वह इस दबाव के आगे झूक जाती तो कोई विद्रोह ही नहीं होता। वर्तमान में बांग्लादेश चुनाव मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच एक सीधा मुकाबला बनता दिख रहा है।