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रूस से सस्ता तेल खरीदना हुआ कम? खाड़ी देशों की ओर फिर मुड़ा भारत, समझें मोदी सरकार का नया मास्टरप्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति के रूसी ऑयल टैरिफ के बाद भारत ने अपने ऑयल गेम को पूरी तरह से बदल दिया है. अगर इस बात को यूं कहें कि भारत का रूसी तेल से ब्रेकअप और खाड़ी देशों के तेल के पैचअप हो गया है, तो गलत नहीं होगा. वास्तव में रूसी तेल की सप्लाई में लगातार कमी देखने को मिल रही है. वहीं खाड़ी देशों के कच्चे तेल की सप्लाई में इजाफा देखने को मिल रहा है. भारत के इस ऑयल गेम से पूरी दुनिया चौंक गई है. वहीं दूसरी ओर भारत ने हाल के दिनों में कुछ नए देशों के साथ ऑयल सप्लाई की डील की है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आंकड़े किस तरह की कहानी बयां कर रहे हैं?

कैसे बढ़ रही खाड़ी देशों की सप्लाई?

भारत ने कच्चे तेल के आयात की रणनीति में बदलाव करते हुए कम जोखिम वाली सप्लाई पर जोर दिया है. इसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि सीमित मात्रा में रूस से सप्लाई भी बनी हुई है. विश्लेषण फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार जनवरी के पहले तीन हफ्तों में रूसी कच्चे तेल का आयात गिरकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो पिछले महीने औसतन 12.1 लाख बैरल प्रतिदिन और मिड 2025 में 20 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा अधिक था.

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 90 प्रतिशत आयात पर निर्भर है. केप्लर के आंकड़ों के अनुसार इराक अब रूस के बराबर मात्रा में सप्लाई कर रहा है, जबकि दिसंबर 2025 में यह औसतन 9,04,000 बैरल प्रतिदिन था. सऊदी अरब से आने वाली मात्रा भी इस महीने बढ़कर 9,24,000 बैरल प्रतिदिन हो गई है, जो दिसंबर में 7,10,000 बैरल प्रतिदिन और अप्रैल 2025 में 5,39,000 बैरल प्रतिदिन थी.

2022 ने रूस ने छोड़ा था इराक को पीछे

रूस 2022 में इराक को पीछे छोड़कर भारत का टॉप सप्लायर बन गया था, जब भारतीय रिफाइनरी ने भारी छूट वाले रूसी तेल को खरीदने के लिए तेजी दिखाई थी. दरअसल यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण के बाद यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था. केप्लर के शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि जनवरी 2026 में भारत की कच्चे तेल की खरीद कम जोखिम वाली और अधिक विश्वसनीय आपूर्ति की ओर एक स्पष्ट बदलाव दिखाती है. इसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि सीमित मात्रा में रूस का प्रवाह भी बना हुआ है.