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PSPCL Smart Phone Controversy: पावरकॉम में महंगे स्मार्ट फोन बांटने पर बवाल; बिजली कर्मचारियों ने लगाया करोड़ों के घोटाले का आरोप

पटियाला/सनौर: पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की मैनेजमैंट एक बार फिर बड़े और गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। पहले ही एक कथित घोटाले के कारण जहां राज्य के बिजली मंत्री प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शिकंजे में हैं और पावरकॉम के चेयरमैन को ई.डी. का नोटिस मिल चुका है, वहीं अब मैनेजमैंट द्वारा अपने मैदानी कर्मचारियों पर जबरन थोपे जा रहे महंगे स्मार्ट फोनों के कारण हजारों बिजली कर्मचारियों में हाहाकार मच गई है। कर्मचारियों का सवाल है कि आखिर छोटे कर्मचारियों पर ये महंगे फोन क्यों थोपे जा रहे हैं, जबकि मौजूदा दौर में हर छोटे से छोटे कर्मचारी के पास भी अपना निजी स्मार्टफोन होता है। कर्मचारियों के मुताबिक, उनके निजी फोन को भी बिजली बोर्ड के ऑनलाइन सिस्टम से आसानी से जोड़ा जा सकता था। इस अप्रत्याशित मोबाइल खरीद मामले में करोड़ों रुपए की वित्तीय हेराफेरी होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

📱 ‘कर्मचारियों की लोकेशन और हर गतिविधि पर रहेगी नजर’: यूनियनों ने स्मार्ट फोन को बताया निजता के अधिकार पर सीधा हमला

पावरकॉम के आला अधिकारियों का तर्क है कि यह स्मार्ट फोन तकनीकी कर्मचारियों (फील्ड स्टाफ) को ऑनलाइन शिकायतों को जल्द से जल्द क्लोज (निपटारा) करने के मुख्य उद्देश्य से दिया जा रहा है। इसके विपरीत, बिजली बोर्ड की सभी प्रमुख यूनियनों द्वारा इसका चौतरफा और जोरदार विरोध किया जा रहा है। यूनियनों का साफ कहना है कि यह कदम सीधे तौर पर कर्मचारियों के निजता के अधिकार (Right to Privacy) पर हमला है। इस सरकारी फोन का पूरा रिमोट कंट्रोल विभाग के आई.टी. (IT) विंग के पास सुरक्षित होगा, जिससे ड्यूटी के दौरान और उसके बाद भी प्रत्येक कर्मचारी की लाइव लोकेशन और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। इस फोन के माध्यम से हर कर्मचारी को हर शिकायत को बंद करने के लिए इसमें इंस्टॉल विशेष ऐप के जरिए ही लॉगइन करना पड़ेगा और इस फोन में विभाग के आधिकारिक सिस्टम के अलावा अन्य कुछ भी नहीं चल सकेगा।

💰 ₹21 हजार का सैमसंग फोन युद्ध स्तर पर बांटने में तेजी: वित्तीय तंगी का रोना रोने वाले विभाग के इस कदम पर उठे गंभीर सवाल

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, यह सैमसंग (Samsung) कंपनी की ए-सीरीज का 07 नंबर मॉडल फोन है, जिसे विभाग ने थोक में प्रति फोन करीब 21 हजार रुपए की भारी-भरकम कीमत में खरीदा है। कर्मचारियों तथा यूनियनों की किसी भी मांग या सहमति के बिना जबरन पूरे पंजाब के लाइनमैन, सहायक लाइनमैन और ग्रिड कर्मचारियों को यह फोन बहुत तेजी से युद्ध स्तर पर वितरित किया जा रहा है। यूनियन नेताओं ने गंभीर आशंका जताई कि इस फोन खरीद मामले में कई करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला हुआ है, क्योंकि विभाग हमेशा कर्मचारियों की जायज मांगों (जैसे एरियर और भत्ते) को पावरकॉम की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देकर टालता रहा है। पिछली 30 अप्रैल को मैनेजमैंट के साथ बैठक में बनी सहमतियों को लागू न करने के कारण कर्मचारी वैसे ही संघर्ष की राह पर हैं, ऐसे माहौल में बिना मांगे करोड़ों के स्मार्ट फोन बांटना पूरी दाल काली होने का संकेत देता है।