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चुराचांदपुर में मैतेई व्यक्ति की हत्या के बाद हिंसा

मणिपुर में शांति के बाद तेजी से बिगड़ रहे हैं हालात

  • घटना का वीडियो भी वायरल किया गया

  • यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी पर शक

  • फिर से सामुदायिक तौर पर तनाव

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः मणिपुर के चुराचांदपुर जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ महीनों की शांति के बाद फिर से जातीय हिंसा की चिंगारी भड़क उठी है। एक मैतेई व्यक्ति की अपहरण के बाद संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा हत्या कर दी गई है, जिससे राज्य में जारी शांति प्रयासों को गहरा धक्का लगा है।

मृतक की पहचान मयंगलाम्बम ऋषिकांत सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से इंफाल घाटी के काकचिंग खुनौ के रहने वाले थे। ऋषिकांत अपनी कुकी पत्नी चिंगनु हाओकिप के साथ चुराचांदपुर के तुइबोंग इलाके में रह रहे थे। बुधवार को संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने उनके घर से दोनों का अपहरण कर लिया।

बाद में, पत्नी को छोड़ दिया गया, लेकिन ऋषिकांत की गोली मारकर हत्या कर दी गई। विशेष बात यह है कि ऋषिकांत ने अपनी शादी के बाद एक आदिवासी नाम  गिनमिनथांग अपना लिया था। वे नेपाल में कार्यरत थे और घटना से महज तीन दिन पहले ही घर लौटे थे।

सोशल मीडिया पर इस घटना का एक कथित वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें ऋषिकांत जमीन पर बैठकर हाथ जोड़कर हमलावरों से जीवन की भीख मांगते नजर आ रहे हैं। इसके कुछ ही पलों बाद गोलियों की गूँज सुनाई देती है और उनका शव जमीन पर गिर जाता है। पुलिस ने देर रात ‘नाटजांग’ गाँव से शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस मामले में पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया है।

इस हत्याकांड के पीछे यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी का हाथ होने का संदेह है। गौरतलब है कि यह संगठन उन दो दर्जन कुकी समूहों में शामिल नहीं है जिन्होंने सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर में पिछले साल 13 फरवरी से लागू राष्ट्रपति शासन के हटने और नई सरकार के गठन की अटकलें तेज हो रही थीं।

मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष ने राज्य को आंतरिक रूप से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच विभाजित कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस खूनी संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। विस्थापितों की एक बड़ी संख्या आज भी विभिन्न राहत शिविरों में रहने को मजबूर है।