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High Court on Indore Tragedy: इंदौर के मृतकों की सूची छुपाने पर सरकार को घेरा, क्या जांच कमेटी सिर्फ खानापूर्ति है?

इंदौर : शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों के बीमार पड़ने और मौतें होने के मामले में 20 जनवरी को हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा राशि बढ़ाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की.

अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी

याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 27 जनवरी को सुनवाई करने के निर्देश दिए. हाई कोर्ट ने इस दिन चीफ सेक्रेटरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने को कहा है. सुनवाई के दौरान फरवरी 2023 में पाइपलाइन डालने के बाद के रिकॉर्ड कोर्ट में रखे गए. इस मामले की जांच के लिए गठित की गई कमेटी को लेकर भी याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आशंका व्यक्त की है.

सुनवाई में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट रखी

अधिवक्ताओं ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की 2018 और 2019 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा “इंदौर का पानी दूषित होना पाया गया था. इसके बाद भी नगर निगम के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. उन सभी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और जिसकी भी लापरवाही है, उन सभी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज किया जाए.”

स्टेटस रिपोर्ट में मौत का आंकड़े का खुलासा नहीं किया गया. स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौत के आंकड़े जारी हुए हैं. मृतकों के नामों की सूची अधिवक्ताओं ने मांगी है.

अधिवक्ताओं ने मृतकों की सूची मांगी

एडवोकेट अजय बगड़िया ने बताया “अभी तक 25 मौतें सामने आ चुकी हैं. इसके अलावा मुआवजे के रूप में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से राशि दी गई, जबकि ये मुआवजा नहीं कहलाता. मुआवजे की राशि अलग है. सरकार ने मुआवजे की राशि का जवाब नहीं दिया है.”

स्टेटस रिपोर्ट को लेकर भी भ्रम की स्थिति

इससे पहले की सुनवाई में हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे “याचिकाकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से स्टेटस रिपोर्ट सौंपें.” क्योंकि संबंधित विभागों की ओर से याचिकाकर्ताओं को स्टेटस रिपोर्ट नहीं दी गई. वहीं, कांग्रेस सहित कुछ समाचार पत्रों का दावा है कि भागीरथपुरा में अब जहरीले पानी से 24 मौतें हो चुकी हैं.