नोएडा स्पोर्टस सिटी में करोड़ों का घोटाला
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः 16 जनवरी की आधी रात को 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक गहरे और बदबूदार दलदल में गिर गई। साढ़े तीन दिनों की तलाश के बाद उनकी ‘ग्रैंड विटारा’ कार और शव को पानी से बाहर निकाला गया। इस हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पद से हटा दिया है और एक एसआईटी का गठन किया है। साथ ही, संबंधित जमीन के मालिक बिल्डर विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
यह मामला 2004 में शुरू हुआ था जब नोएडा प्राधिकरण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित करने का निर्णय लिया। 2014 में, सेक्टर 150 में 120 हेक्टेयर भूमि स्पोर्ट्स सिटी के लिए आवंटित की गई। बिल्डर को कुल जमीन के 70 फीसद हिस्से पर खेल सुविधाएं विकसित करनी थीं। इसकी लागत निकालने के लिए उसे 29.5 प्रतिशत हिस्से पर आवासीय और 0.5 प्रतिशत पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई। लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को 2,300 करोड़ रुपये से अधिक में यह प्रोजेक्ट मिला। 2021 की सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, खेल सुविधाएं विकसित किए बिना ही आवासीय प्लॉट बेच दिए गए। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि इस पूरे प्रोजेक्ट में सरकार को 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
24 फरवरी 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे एक विशालकाय घोटाला करार देते हुए कहा कि नोएडा प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं था। अदालत ने टिप्पणी की कि अधिकारियों ने आंखें मूंद ली थीं जबकि बिल्डर आवासीय फ्लैट बेच रहे थे और खेल सुविधाओं का नामोनिशान नहीं था। अदालत के आदेश पर 17 मार्च 2025 को सीबीआई ने लोटस ग्रीन, उसके निदेशकों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया।
हैरानी की बात यह है कि मार्च 2022 में विज़टाउन कंपनी ने नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि उनके प्लॉट (जहां युवराज की कार गिरी) में सीवर और ड्रेन लाइन टूटने के कारण भारी जलजमाव हो रहा है। पत्र में स्पष्ट रूप से गंभीर हादसे की आशंका जताई गई थी, लेकिन प्राधिकरण ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। 2015 से चल रही ड्रेनेज और नहर बनाने की चर्चा फाइलों में ही दबी रही, जिसकी कीमत अंततः एक युवक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।