ईडी के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
-
केरल और तमिलनाडु की याचिका स्वीकृत
-
अदालत ने ईडी को नोटिस जारी कर दिया
-
केंद्र राज्य के विवाद का निपटारा शीर्ष अदालत में
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर विचार करने का निर्णय लिया है कि क्या प्रवर्तन निदेशालय एक विधिक व्यक्ति है, जो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्च न्यायालयों में रिट याचिका दायर करने का हकदार है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने केरल और तमिलनाडु सरकारों द्वारा दायर अपीलों पर ईडी को नोटिस जारी किया है। ये अपीलें केरल उच्च न्यायालय के सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती देती हैं, जिसमें ईडी को रिट याचिका दायर करने के लिए लोकस स्टैंडाई यानी कानूनी अधिकार संपन्न माना गया था। बता दें कि इससे पहले ममता बनर्जी ने सड़क पर ईडी की छापामारी को चुनौती दी है जबकि बाद में झारखंड पुलिस ने ईडी के कार्यालय पर छापा मारकर यह बता दिया है कि अब मामला एकतरफा नहीं चलेगा।
मामले की पृष्ठभूमि और केरल उच्च न्यायालय का फैसला यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल सरकार ने यूएई गोल्ड स्मगलिंग केस में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य नेताओं को कथित रूप से फंसाने की कोशिशों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग (जस्टिस वी.के. मोहनन आयोग) का गठन किया था।
ईडी ने इस आयोग के गठन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। सितंबर 2025 में, केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस पुराने आदेश को बरकरार रखा था, जिसने राज्य सरकार द्वारा गठित इस न्यायिक जांच पर रोक लगा दी थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में चल रही आपराधिक कार्यवाही के समानांतर किसी जांच आयोग को अनुमति देना न्याय की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है।
केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने दलील दी कि ईडी को रिट याचिका दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि केंद्र और राज्य के बीच कोई विवाद है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 131 (उच्चतम न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार) के तहत केवल सुप्रीम कोर्ट में ही उठाया जाना चाहिए। वहीं, ईडी का तर्क है कि पीएमएलए और यूएपीए जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत जांच करना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और राज्य सरकार का हस्तक्षेप संघीय ढांचे के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
निष्कर्ष का महत्व सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भविष्य के लिए एक बड़ा नजीर बनेगा। यदि न्यायालय यह व्यवस्था देता है कि ईडी एक स्वतंत्र कानूनी इकाई के रूप में रिट याचिका दायर नहीं कर सकता, तो इससे केंद्रीय एजेंसियों की कानूनी शक्तियों और राज्यों के साथ उनके टकराव की स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन आ सकता है।