Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर किरेन रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार रामपुरहाट टीएमसी दफ्तर में फंदे से लटके मिले पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी: सुसाइड नोट में मानसिक ... 'बिहार बन रहा पेपर लीक की राजधानी': तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला, 19 अगस्त को राजभवन मार्च... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, छिड़ा सियासी घमासान बरेली: सरकारी नौकरी का झांसा देकर रचाई शादी, विरोध पर बेल्ट से पीटा और छीने जेवर; पति समेत ससुराल वा... सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, बड़ी ... भिवंडी: दरगाह में इलाज के नाम पर महिला से अघोरी रस्में व प्रताड़ना; UP भागने की फिराक में था मौलवी, ... दिल्ली में पूरा हुआ 100 'अटल कैंटीन' का संकल्प: DU मेट्रो स्टेशन से 25 नई कैंटीन शुरू, मात्र ₹5 में ... रीवा में स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही: 2 घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, सांस लेने में तकलीफ से जूझ... खान-खनिज संशोधन बिल के खिलाफ रांची में राजद-वाम दलों का साझा मोर्चा: आर्थिक नाकेबंदी और दिल्ली घेराव...

तेलंगाना की राजनीति में बदलाव की आहट मिली

प्रशांत किशोर और के. कविता की मुलाकात

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपनी पार्टी जन सुराज के निराशाजनक प्रदर्शन (जहां पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई) के बाद, प्रशांत किशोर एक बार फिर राजनीतिक परामर्श की दुनिया में लौट सकते हैं। इस बीच, तेलंगाना में बीआरएस से अलग होकर अपनी नई राह चुन रहीं कलवकुंतला कविता और प्रशांत किशोर के बीच बढ़ती नजदीकियां नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो महीनों में प्रशांत किशोर और कविता के बीच दो महत्वपूर्ण मुलाकातें हुई हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संक्रांति के समय हुई हालिया बैठक करीब पांच दिनों तक चली। माना जा रहा है कि इन लंबी मुलाकातों के दौरान कविता की प्रस्तावित नई पार्टी के सिद्धांतों, विचारधारा और चुनावी रणनीति पर गहन चर्चा हुई है। कविता अपनी नई पार्टी को तेलंगाना की अस्मिता और जन-आकांक्षाओं से जोड़ने की योजना बना रही हैं।

इस संभावित गठबंधन के पीछे कई ठोस कारण नजर आते हैं। प्रशांत किशोर को तेलुगु राजनीति का गहरा अनुभव है। उन्होंने 2019 में वाईएस जगन मोहन रेड्डी के ऐतिहासिक चुनाव अभियान का नेतृत्व किया था। इसके अलावा, उन्होंने बीआरएस नेतृत्व (केटीआर और केसीआर) के साथ भी काम किया है। कविता इस समय तेलंगाना की राजनीति में अकेली खड़ी हैं। बीआरएस से निलंबन के बाद, उनके पास कोई बड़ा राजनीतिक मार्गदर्शक नहीं है। ऐसे में वे पीके के अनुभव का लाभ उठाकर एक मजबूत तीसरा विकल्प खड़ा करना चाहती हैं।

बिहार में सक्रिय राजनीति के अपने पहले बड़े इम्तिहान में असफल रहने के बाद, पीके के लिए परामर्श की दुनिया में सफल वापसी का यह एक बड़ा मौका हो सकता है। अभी तक दोनों पक्षों की ओर से इस सहयोग पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन जिस तरह से कविता अपनी तेलंगाना जागृति संस्था को राजनीतिक दल में बदलने की तैयारी कर रही हैं और 50 से अधिक समितियों के माध्यम से जमीनी रिसर्च करवा रही हैं, उससे साफ है कि वे एक पेशेवर और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ना चाहती हैं—जो प्रशांत किशोर की कार्यशैली का ट्रेडमार्क रहा है।