पांच दिनों से लगातार सतर्क है भारतीय सेना
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर से गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। पिछले पांच दिनों के भीतर केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न सेक्टरों में संदिग्ध ड्रोनों के देखे जाने की यह तीसरी घटना है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रख दिया है। ताजा घटनाक्रम में, जम्मू और पुंछ के संवेदनशील इलाकों में आज शाम पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते हुए पाए गए।
रक्षा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहला संदिग्ध ड्रोन जम्मू सेक्टर के अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास देखा गया। भारतीय सेना ने बिना किसी देरी के त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए इन ड्रोनों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इसके साथ ही, अत्याधुनिक काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम को तत्काल सक्रिय कर दिया गया ताकि इन मानवरहित विमानों को मार गिराया जा सके या उनका संपर्क उनके बेस से काटा जा सके। इसके कुछ ही समय बाद, पुंछ जिले के देगवार सेक्टर में एक और ड्रोन को भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए देखा गया।
भारतीय रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि नियंत्रण रेखा के उस पार तैनात पाकिस्तानी सेना और उनकी खुफिया एजेंसियां इन भारी-भरकम और अत्याधुनिक ड्रोनों का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति के तहत कर रही हैं। इन ड्रोनों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सीमा में छिपे आतंकवादियों तक अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद, संचार उपकरण और नकदी पहुँचाना है। इसके अतिरिक्त, पिछले कुछ वर्षों में पंजाब और जम्मू की सीमाओं पर ऐसे कई ड्रोन पकड़े गए हैं, जिनका उपयोग नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी के लिए किया जा रहा था ताकि भारतीय युवाओं को नशे के जाल में फंसाया जा सके।
यह हालिया घुसपैठ विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि मई 2025 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पर एक लंबी शांति छाई हुई थी। उस अभियान के दौरान घुसपैठ के कई नेटवर्क ध्वस्त किए गए थे। हालांकि, अब ऐसा प्रतीत होता है कि सर्दी और धुंध का फायदा उठाकर पाकिस्तान फिर से घुसपैठ के अपने पुराने तरीकों पर लौट रहा है। सुरक्षा बलों ने अब पूरी एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गश्त तेज कर दी है और स्थानीय निवासियों को भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को देने के लिए कहा गया है।