सेना छोड़ने और भर्ती से भागने वालों की संख्या बढ़ी
कीवः यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव ने स्वीकार किया है कि रूसी सेना के खिलाफ युद्ध अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ केवल आधुनिक हथियार जीत की गारंटी नहीं दे सकते। यूक्रेन वर्तमान में ‘सैनिकों के अकाल’ से जूझ रहा है। दो साल से अधिक समय से जारी निरंतर गोलाबारी और खाइयों की लड़ाई ने यूक्रेनी सेना की जनशक्ति को गंभीर रूप से निचोड़ दिया है।
मंत्री उमेरोव की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य सैनिकों का मैदान छोड़कर भागना है। अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिक महीनों से बिना रोटेशन (विश्राम के लिए घर वापसी) के लड़ रहे हैं। रोटेशन की कमी के कारण सैनिकों में भारी मानसिक और शारीरिक थकान है। रूस के पास सैनिकों का एक विशाल भंडार है, जबकि यूक्रेन के पास सीमित जनसंख्या है। फ्रंटलाइन पर सैनिकों की कमी का मतलब है कि एक ही टुकड़ी को अपनी क्षमता से अधिक लंबे समय तक मोर्चे पर टिके रहना पड़ रहा है।
यूक्रेन ने हाल ही में लामबंदी की उम्र 27 से घटाकर 25 वर्ष कर दी है, लेकिन इसके परिणाम उत्साहजनक नहीं रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लगभग 30 लाख यूक्रेनी पुरुष सैन्य भर्ती के योग्य होने के बावजूद सिस्टम से गायब हैं। उन्होंने न तो अपने पते अपडेट किए हैं और न ही वे भर्ती केंद्रों के बुलावे का जवाब दे रहे हैं।
यूक्रेन में एक बड़ा संकट ‘मेडिकल एक्जेंप्शन’ का है। अमीर और रसूखदार युवा भ्रष्टाचार के जरिए खुद को अनफिट घोषित करवा रहे हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। इस संकट से निपटने के लिए जेलेंस्की सरकार अब दंडात्मक कार्रवाई की ओर बढ़ रही है। ड्राफ्ट से बचने वालों के बैंक खाते फ्रीज करना और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करना।
अमेरिका और नाटो देश यूक्रेन को टैंक, मिसाइलें और विमान तो दे सकते हैं, लेकिन वे अपने सैनिक नहीं भेज सकते। पश्चिमी देशों का भी मानना है कि यदि यूक्रेन अपने भीतर सैनिकों की भर्ती नहीं कर पाता, तो डोनबास और पोक्रोव्स्क जैसे रणनीतिक शहरों को बचाना नामुमकिन होगा।
युद्ध के शुरुआती महीनों में जो उत्साह देखा गया था, वह अब युद्ध की थकान में बदल चुका है। यूक्रेन के भीतर अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या केवल सख्ती से युवाओं को युद्ध में धकेला जा सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सैनिकों के लिए उचित रोटेशन, बेहतर प्रशिक्षण और उनके परिवारों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक केवल कानून बनाकर युद्ध नहीं जीता जा सकता।
रुस्तम उमेरोव का यह खुलासा यूक्रेन के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। यह रूस की उस रणनीति की जीत को भी दर्शाता है जिसमें वह यूक्रेन को आर्थिक और जनसांख्यिकीय रूप से थकाकर घुटनों पर लाना चाहता है।