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पीएम ओर्बन की पार्टी सर्वेक्षण में पीछे

पहले से जारी सरकार विरोधी आंदोलनों का असर दिख रहा

बुडापेस्टः पिछले 14 वर्षों से हंगरी की राजनीति के निर्विवाद नायक रहे विक्टर ओर्बन को अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में आए दो प्रमुख ओपिनियन पोल्स ने यह संकेत देकर पूरे यूरोप को चौंका दिया है कि ओर्बन की फिडेज़ पार्टी अपनी बढ़त खो चुकी है।

पहली बार, पीटर मग्यार और उनकी टिसज़ा पार्टी लोकप्रियता के मामले में सत्ताधारी दल से आगे निकल गई है। पीटर मग्यार का उभार किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। वह कभी ओर्बन के बेहद करीबी घेरे का हिस्सा थे और एक उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी थे।

उनके द्वारा विद्रोह करने और सरकार के भीतर फैले भ्रष्टाचार के सबूत सार्वजनिक करने के बाद से वह रातों-रात विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे बन गए हैं। मग्यार की आधुनिक शैली और सोशल मीडिया पर उनकी पकड़ ने हंगरी के युवाओं को यह विश्वास दिलाया है कि ओर्बन का विकल्प संभव है। मग्यार ने न्याय व्यवस्था और मीडिया पर सरकार के कड़े नियंत्रण को मुख्य मुद्दा बनाया है।

ओर्बन की घटती लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण हंगरी की जर्जर होती अर्थव्यवस्था है। हंगरी पिछले कई महीनों से यूरोपीय संघ में सबसे अधिक मुद्रास्फीति दर का सामना कर रहा है। खाद्य सामग्री और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग को सड़कों पर आने के लिए मजबूर कर दिया है। लोकतांत्रिक मानदंडों के उल्लंघन के कारण यूरोपीय संघ ने हंगरी को मिलने वाली अरबों यूरो की वित्तीय सहायता पर रोक लगा दी है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और खराब हुई है।

विक्टर ओर्बन को यूरोपीय संघ के भीतर एक बागी नेता माना जाता है। वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति नरम रुख रखते हैं और अक्सर यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता में वीटो का उपयोग कर बाधा डालते रहे हैं। यदि टिसज़ा पार्टी चुनाव जीतती है, तो हंगरी और यूरोपीय संघ के बीच का तनाव समाप्त हो सकता है। यह यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में यूरोपीय एकजुटता को और मजबूत करेगा।

हालांकि सर्वे में फिडेज़ पिछड़ रही है, लेकिन ओर्बन को कम आंकना जल्दबाजी होगी। उनके पास देश के अधिकांश मीडिया संस्थानों पर नियंत्रण है और उनकी राष्ट्रवादी बयानबाजी अभी भी ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ रखती है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में फिडेज़ पार्टी आक्रामक प्रचार और जन-लुभावन घोषणाओं के जरिए वापसी की कोशिश करेगी।

हंगरी की जनता अब स्थिरता और बदलाव के बीच फंसी है। पीटर मग्यार की रैलियों में उमड़ने वाला जनसैलाब इस बात का गवाह है कि जनता अब केवल राष्ट्रवाद से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह बेहतर जीवन स्तर और भ्रष्टाचार मुक्त शासन चाहती है।