मणिपुर में सामाजिक विभाजन की रेखा फिर से चमकने लगी
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केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है
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राजनीतिक मांगों के समाधान की मांग
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थलसेनाध्यक्ष ने कहा स्थिति में सुधार
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष के बीच कुकी-जो समुदाय ने अपनी मांगों को लेकर दबाव तेज कर दिया है। 14 जनवरी को चुराचंदपुर और मोरेह जैसे कुकी बहुल क्षेत्रों में हजारों लोगों ने विशाल रैलियां निकालीं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक विधायिका के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश का गठन नहीं होता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
कुकी-जो परिषद और स्वदेशी जनजातीय नेताओं के मंच ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि उनकी राजनीतिक मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो मणिपुर में हिंसा फिर से भड़क सकती है। कुकी संगठनों ने 2027 के आम चुनावों से पहले एक निश्चित राजनीतिक समाधान की समय सीमा तय की है। संयुक्त मंच ने प्रस्ताव पारित किया है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो वे भविष्य में निर्वाचित सरकार के गठन की प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
एक ओर जहाँ कुकी समुदाय प्रशासनिक अलगाव की मांग कर रहा है, वहीं मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने राज्य में किसी भी प्रकार के बफर जोन की मौजूदगी को खारिज किया है। राज्यपाल ने इम्फाल में प्रदर्शन कर रहे विस्थापित व्यक्तियों और नागरिक संगठनों को आश्वासन दिया कि पुनर्वास की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा रहा है।
दूसरी ओर, भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि 2025 में मणिपुर की सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई और सरकार की सक्रिय पहलों को इसका श्रेय दिया। सेना प्रमुख ने डूरंड कप जैसे आयोजनों के सफल संचालन का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
वर्तमान स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। जहाँ सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रित करने का दावा कर रहे हैं, वहीं कुकी-जो समुदाय का बढ़ता असंतोष और अलग प्रशासन की मांग राज्य के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 32 महीनों से जारी जनसांख्यिकीय अलगाव को खत्म करने के लिए अब केंद्र के हस्तक्षेप पर सबकी नज़रें टिकी हैं।