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सऊदी बनाम यूएई: खाड़ी के दो शेरों में छिड़ी ‘कोल्ड वार’, क्या मुस्लिम ब्लॉक में अलग-थलग पड़ रहा है अमीरात?

कभी गल्फ का सबसे बिजनेस-फ्रेंडली माने जाने वाला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आज मुस्लिम दुनिया में तेजी से अलग-थलग पड़ता दिख रहा है. एक के बाद एक देश उसके खिलाफ खड़े हो रहे हैं. यमन में सऊदी अरब से टकराव, सूडान में जनसंहार जैसे गंभीर आरोप और अब सोमालिया द्वारा सभी समझौते रद्द किया जाना इस बदलते ट्रेंड की साफ़ तस्वीर पेश करता है.

यही वजह है कि गल्फ की राजनीति में एक सवाल जोर पकड़ रहा है क्या यूएई उसी राह पर बढ़ रहा है, जिस पर कभी ईरान चला था? ईरान भी कभी क्षेत्रीय ताकत था मगर फिर धीरे धीरे अलग-थलग पड़ गया. आज यूएई को लेकर भी कुछ ऐसे ही संकेत दिखने लगे हैं.

सोमालिया का बड़ा कदम, सभी समझौते रद्द

सोमालिया ने यूएई के साथ सभी सरकारी समझौते रद्द कर दिए हैं. इसमें सैन्य ठिकानों और प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े करार भी शामिल हैं. मोगादिशू सरकार के मुताबिक, यह फैसला देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए लिया गया है. मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने बोसासो सहित सोमालिया के कई इलाकों से अपने सैनिक और सैन्य उपकरण हटाने शुरू कर दिए हैं, जिन्हें कथित तौर पर इथियोपिया भेजा जा रहा है. हालांकि, पंटलैंड प्रशासन ने केंद्र सरकार के फैसले को अवैध बताया है.

सोमालिलैंड और इजराइल एंगल

सोमालिया-यूएई तनाव की एक बड़ी वजह सोमालिलैंड है जो खुद को सोमालिया से अलग देश मानता है. हाल ही में इजराइल ने सोमालिलैंड की संप्रभुता को औपचारिक मान्यता दे दी, जिससे विवाद और गहरा गया. रणनीतिक बंदरगाह शहर बेरबेरा, जो अदन की खाड़ी में स्थित है, यूएई और उसके सहयोगियों के लिए बेहद अहम माना जाता है. सोमालिया का आरोप है कि यूएई और इजराइल की नजदीकी उसकी क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा है.

सूडान का आरोप, यूएई जनसंहार में साझेदार

यूएई पर सबसे गंभीर आरोप सूडान ने लगाए हैं. खार्तूम सरकार ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में यूएई के खिलाफ केस दायर कर उसे रैपिड सपोर्ट फोर्सेज़ (RSF) का समर्थक बताया है. सूडान का दावा है कि पश्चिमी दारफुर में मसालिट समुदाय के खिलाफ हो रहे जनसंहार में यूएई सैन्य, वित्तीय और राजनीतिक रूप से शामिल है. यूएई ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया है, लेकिन मुस्लिम देशों में उसकी छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है.

यमन में सऊदी-यूएई टकराव खुलकर सामने

सऊदी अरब और यूएई के बीच वर्षों से दबा तनाव अब खुली टकराव की शक्ल ले चुका है. दिसंबर 2025 में सऊदी अरब ने यूएई पर यमन के अलगाववादी संगठन साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को हथियार देने का आरोप लगाया. इसके बाद सऊदी समर्थित बलों ने STC से कई इलाके छीन लिए और उसके नेता ऐदरूस अल-जुबैदी को सत्ता ढांचे से बाहर कर दिया गया. इस घटनाक्रम ने यमन में यूएई के प्रभाव को लगभग खत्म कर दिया और हूती विद्रोहियों के खिलाफ बना गठबंधन भी कमजोर पड़ गया.