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LAC और LOC पर ‘अदृश्य’ पहरा: सेना के बेड़े में शामिल हुआ सोलर ड्रोन, हफ्तों तक आसमान से करेगा दुश्मनों की जासूसी

भारतीय सेना ने लंबी दूरी और लंबे समय तक निगरानी के लिए सोलर पावर्ड ड्रोन सिस्टम की खरीद का अहम करार किया है. भारतीय सेना ने बेंगलुरु स्थित NewSpace Research & Technologies के साथ 168 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. यह पहली बार है जब सेना ने इस तरह का सोलर आधारित UAV सिस्टम खरीदा है.

इस सिस्टम का नाम MAPSS (Mobile Autonomous Persistent Surveillance System) है. यह ड्रोन 26,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है और 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार मिशन पर रह सकता है. दिन में यह सोलर एनर्जी से खुद को चार्ज करता है और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन से उड़ान जारी रखता है.

कहां तक निगरानी करने में है सक्षम?

MAPSS ड्रोन से सीमाओं पर चुपचाप निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और कम्युनिकेशन रिले जैसे काम किए जा सकते हैं. यह सिस्टम हिमालयी इलाकों से लेकर रेगिस्तानी सीमाओं तक प्रभावी निगरानी में सक्षम है.

भारतीय सेना द्वारा सोलर पावर्ड MAPSS ड्रोन सिस्टम की खरीद को चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है. यह सिस्टम ऐसे समय में आया है, जब भारत को एक साथ LOC और LAC पर सतर्कता बनाए रखनी पड़ रही है.

LAC पर चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लगातार सैन्य गतिविधियां और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण देखा जा रहा है. 26,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर 24 घंटे से अधिक उड़ान भरने वाला MAPSS ड्रोन लद्दाख और अरुणाचल जैसे दुर्गम इलाकों में चीन की हर हलचल पर बिना रुके निगरानी करने में सक्षम होगा.

LOC पर पाकिस्तान की घुसपैठ और ड्रोन चुनौती

पाकिस्तान की ओर से LOC पर घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियार और नशे की तस्करी लगातार चुनौती बनी हुई है. MAPSS जैसे साइलेंट और लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन से पाकिस्तानी गतिविधियों पर गुप्त और लगातार नजर रखी जा सकेगी.

आत्मनिर्भर और ग्रीन डिफेंस की दिशा में कदम

iDEX योजना के तहत हुआ यह सौदा भारत की आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन डिफेंस टेक्नोलॉजी नीति को भी मजबूती देता है. साफ है कि LOC हो या LAC, भारतीय सेना अब हाई-टेक, स्वदेशी और टिकाऊ सिस्टम के जरिए चीन और पाकिस्तान दोनों की चुनौतियों का जवाब देने को तैयार है.