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पुडुचेरी राजनीति में अचानक बड़े भूचाल का संकेत

मुख्यमंत्री रंगास्वामी ने कहा एनडीए छोड़ेंगे

  • विधानसभा चुनाव अब बहुत करीब है

  • मांडविया से मिलने से किया साफ इंकार

  • जोस चार्ल्स मार्टिन की पार्टी का मुद्दा

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः पुडुचेरी की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के प्रमुख एन. रंगास्वामी ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने के संकेत दिए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में अब 20 दिनों से भी कम का समय शेष रह गया है। रंगास्वामी की इस नाराजगी ने गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

मंगलवार को विवाद तब और गहरा गया जब मुख्यमंत्री रंगास्वामी ने भाजपा के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया। गठबंधन की सीटों और रणनीति पर चर्चा के लिए मांडविया पुडुचेरी में थे, लेकिन रंगास्वामी के कड़े रुख ने वार्ता को ठंडे बस्ते में डाल दिया। सूत्रों के अनुसार, इस तनातनी का मुख्य कारण लॉटरी किंग कहे जाने वाले सैंटियागो मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन की पार्टी लचिया जननायगा कक्षी को गठबंधन में शामिल करने का प्रस्ताव है। रंगास्वामी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह जोस मार्टिन की पार्टी के साथ गठबंधन में रहने के पक्ष में नहीं हैं और यदि भाजपा उनकी मांगों को अनसुना करती है, तो वह गठबंधन से बाहर निकलने में संकोच नहीं करेंगे।

इसके साथ ही, रंगास्वामी पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर केंद्र सरकार की चुप्पी से भी खफा नजर आ रहे हैं। सोमवार रात को अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। एआईएनआरसी के नेताओं ने बाद में केंद्रीय मंत्री मांडविया से मुलाकात कर उन्हें मुख्यमंत्री की कड़ी आपत्तियों से अवगत कराया। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यदि यह गतिरोध दूर नहीं हुआ, तो केंद्र शासित प्रदेश का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में भी अनिश्चितता का माहौल है। कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच अभी तक सीट बंटवारे को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। सत्तारूढ़ गठबंधन में आई इस दरार ने विपक्ष को एक अवसर तो दिया है, लेकिन उनकी अपनी आंतरिक देरी उन्हें इस स्थिति का पूर्ण लाभ उठाने से रोक रही है। अगले कुछ दिन पुडुचेरी की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।