शीतकालीन सत्र में हर दिन में गतिरोध जारी
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सिख गुरुओं के मुद्दे पर भाजपा नाराज
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आतिशी को निलंबित करने की मांग
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विपक्ष ने कपिल मिश्रा का इस्तीफा मांगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। सत्र के चौथे दिन भी सदन की कार्यवाही भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई, जिसके केंद्र में सिख गुरुओं के अपमान का मुद्दा बना रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती तल्खी को देखते हुए अब सदन की कार्यवाही को एक अतिरिक्त दिन के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस शोर-शराबे के कारण न केवल विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि महत्वपूर्ण वित्तीय रिपोर्ट और विधेयकों पर चर्चा भी अटकी हुई है।
सदन की शुरुआत होते ही भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने गुरुओं का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान के नारों के साथ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। भाजपा विधायक सीधे सदन के वेल (बीचों-बीच) तक पहुँच गए और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार से पूर्व सीएम आतिशी को निलंबित करने की मांग पर अड़ गए। विपक्ष का आरोप है कि आतिशी ने सिख गुरुओं के संदर्भ में अपमानजनक टिप्पणी की है। भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब पूरा देश गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं जयंती मना रहा है, तब आतिशी ने चर्चा के दौरान अवरोध पैदा किया। उन्होंने कटाक्ष किया कि आम आदमी पार्टी को हिंदुत्व, राम मंदिर या सिख गुरुओं की प्रशंसा से आखिर क्या परेशानी है?
इस हंगामे के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सदन के पटल पर कैग की रिपोर्ट पेश करनी थी और दो महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा होनी थी, लेकिन नारेबाजी के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं, जवाबी हमले में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आप विधायकों का दावा है कि कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और गलत तथ्यों वाले ट्वीट साझा किए हैं, जिसके लिए उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए।
भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने आतिशी की सदन में अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सदन में आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि न केवल आतिशी को दंडित किया जाए, बल्कि पूरी आम आदमी पार्टी को इस कृत्य के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। सदन में बढ़ते तनाव और कामकाज न हो पाने की स्थिति को देखते हुए स्पीकर ने कार्यवाही पहले दोपहर 1 बजे तक के लिए और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। अब यह देखना होगा कि सत्र के बढ़े हुए दिन में सदन की मर्यादा बहाल हो पाती है या नहीं।