महानदी की सतकोसिया घाटी में चौदह टीमे सक्रिय
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वरः ओडिशा के अंगुल जिले में स्थित महानदी की प्रसिद्ध सतकोसिया घाटी आज से एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और संरक्षण अभियान का केंद्र बन गई है। यहाँ तीन दिवसीय मगरमच्छ गणना अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में पाए जाने वाले मगरमच्छों की आबादी का सटीक आकलन करना है। इस गणना कार्य को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए तीन प्रमुख वन मंडलों—सतकोसिया, आत्मल्लिक और महानदी—के संसाधनों को एकजुट किया गया है। अभियान के लिए कुल 14 विशेष टीमें गठित की गई हैं, जिनमें वन विभाग के अनुभवी अधिकारियों और वन्यजीव शोधकर्ताओं सहित लगभग 50 सदस्य शामिल हैं। ये टीमें नदी के अलग-अलग हिस्सों और दुर्गम इलाकों में जाकर डेटा एकत्र करेंगी।
वन विभाग ने इस वर्ष की गणना के लिए एक अनूठी और पर्यावरण के अनुकूल रणनीति अपनाई है। मगरमच्छ एक अत्यंत संवेदनशील प्राणी होते हैं जो थोड़ी सी भी मानवीय हलचल या शोर से विचलित हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, विभाग ने गणना के दौरान मोटर चालित नावों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
इसके बजाय, सभी टीमें लकड़ी की पारंपरिक देशी नावों का उपयोग कर रही हैं। मोटर वाली नावों के इंजन का शोर अक्सर मगरमच्छों को डरा देता है, जिससे वे पानी की गहराई में चले जाते हैं या किनारों से दूर भाग जाते हैं, जिससे उनकी सटीक गिनती करना असंभव हो जाता है। शांत और धीमी गति से चलने वाली इन पारंपरिक नावों के प्रयोग से वन अधिकारी मगरमच्छों की प्राकृतिक गतिविधियों में बाधा डाले बिना उनके करीब पहुँच सकेंगे और बेहतर अवलोकन कर पाएंगे।
सतकोसिया घाटी जैव-विविधता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले साल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यहाँ 97 मगर प्रजाति के मगरमच्छ और 18 घड़ियाल दर्ज किए गए थे। घड़ियाल विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं क्योंकि वे दुनिया भर में एक संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध हैं और उनका संरक्षण एक बड़ी वैश्विक चुनौती है।
इस वार्षिक गणना का उद्देश्य केवल संख्या गिनना ही नहीं है, बल्कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करना भी है। यह अभियान यह भी स्पष्ट करेगा कि पिछले एक वर्ष में किए गए संरक्षण प्रयासों का मगरमच्छों के प्रजनन और अस्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ा है। तीन दिनों के इस गहन अभियान के बाद प्राप्त होने वाले आंकड़ों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा, जो भविष्य में सतकोसिया को मगरमच्छों के लिए एक सुरक्षित स्वर्ग बनाने की दिशा में नीति निर्धारण में सहायक सिद्ध होगा।